गड़बड़ कहां और कैसे?
इस संबंध में लोगों का आरोप है कि अक्सर गैस एजेंसियों के हॉकर या बिचौलिए अपने टारगेट को पूरा करने या ब्लैक मार्केटिंग के चक्कर में उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी डिलीवरी चढ़ा देते हैं। इससे दो नुकसान होते हैं। दरअसल दो सिलेंडरों के बीच 25 दिन का अंतर होना अनिवार्य है। फर्जी मैसेज के कारण उपभोक्ता का वह गैप बढ़ जाता है और वह चाहकर भी वाजिब बुकिंग नहीं कर पाते हैं और दूसरा नुकसान यह है कि कागजों पर डिलीवरी होने से सब्सिडी भी उसी फर्जी ट्रांजैक्शन के खाते में चली जाती है।
उपभोक्ता ऐसे करें इस समस्या का समाधान
इस संबंध में पटना के डीएम का कहना है कि अगर आप भी इस तरह इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो तुरंत संबंधित गैस कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर फेक डिलीवरी की शिकायत करें। इसके बाद गैस एजेंसी के मैनेजर को लिखित में आवेदन दें और पावती लें। गैस एजेंसी के मैनेजर अगर आपकी शिकायत पर समस्याओं का समाधान न करें तो तुरंत जिला आपूर्ति अधिकारी से संपर्क कर उनसे लिखित शिकायत करें।