फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केवल नकद दें: यूपीआई भुगतान पर टैक्स के खिलाफ मुहिम; दुकानदारों के लिए लटकाया सिर्फ नकदी का बोर्ड

Fri, 18 Sep 2026 08:43 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतास

सार

यूपीआई के नियमों में बदलाव और संभावित एमडीआर शुल्क को लेकर बिहार के रोहतास में व्यापारियों का विरोध शुरू हो गया है। सासाराम में कई दुकानदारों ने प्रतिष्ठानों के बाहर ‘नो यूपीआई, केवल नगद’ के बोर्ड लगा दिए हैं।
विज्ञापन
दुकान के बाहर लगी सूचना
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश में हाल ही में यूपीआई के नियमों में हुए बदलाव ने आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। यूपीआई की नई नीतियों एवं लेनदेन पर लगने वाले संभावित शुल्क को लेकर व्यापारी वर्ग में काफी रोष है और अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी क्रम में रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में भी कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों के बाहर ‘नो यूपीआई, केवल नगद’ के बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं। इससे डिजिटल लेनदेन के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

जीएसटी, इनकम टैक्स के बाद एमडीआर गलत

विज्ञापन

व्यवसायियों का कहना है कि जीएसटी और इनकम टैक्स लेने के बाद डिजिटल लेनदेन पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाना पूरी तरह गलत है। इससे व्यवसायियों पर बोझ बढ़ेगा और धंधा चौपट हो जाएगा। यूपीआई के नियमों में हुए बदलाव से सबसे ज्यादा छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यवसायी प्रभावित होंगे।

डिजिटल इंडिया की राह मुश्किल
शू व्यवसायी पंकज प्रताप का कहना है कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ये बदलाव राह में मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। इस बदलाव से व्यवसायियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और रोजगार सृजन के अभियान को भी झटका लग सकता है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें- बिहार: पुलिस टीम पर ग्रामीणों का हमला, पथराव में वाहन का शीशा टूटा; ASI घायल उपचार जारी

यूपीआई से मिल रहा था फायदा

विज्ञापन

व्यवसायियों का यह भी कहना है कि यूपीआई के आने से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल रहा था। छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यवसायियों को खुदरा पैसों के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ रही थी, लेकिन अब इस बदलाव ने आम लोगों को भी परेशानी में डाल दिया है। गौरतलब है कि यूपीआई की नई नीतियों का विरोध स्थानीय बाजारों में साफ तौर पर दिखने लगा है। कई प्रतिष्ठानों के बाहर ‘नो यूपीआई’ के बोर्ड लगाए गए हैं और ग्राहकों को भी शुल्क की चिंता सता रही है।

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें