देश में हाल ही में यूपीआई के नियमों में हुए बदलाव ने आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। यूपीआई की नई नीतियों एवं लेनदेन पर लगने वाले संभावित शुल्क को लेकर व्यापारी वर्ग में काफी रोष है और अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। इसी क्रम में रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में भी कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों के बाहर ‘नो यूपीआई, केवल नगद’ के बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं। इससे डिजिटल लेनदेन के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
जीएसटी, इनकम टैक्स के बाद एमडीआर गलत
व्यवसायियों का कहना है कि जीएसटी और इनकम टैक्स लेने के बाद डिजिटल लेनदेन पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाना पूरी तरह गलत है। इससे व्यवसायियों पर बोझ बढ़ेगा और धंधा चौपट हो जाएगा। यूपीआई के नियमों में हुए बदलाव से सबसे ज्यादा छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यवसायी प्रभावित होंगे।
डिजिटल इंडिया की राह मुश्किल
शू व्यवसायी पंकज प्रताप का कहना है कि एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ये बदलाव राह में मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। इस बदलाव से व्यवसायियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा और रोजगार सृजन के अभियान को भी झटका लग सकता है।
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यूपीआई से मिल रहा था फायदा
व्यवसायियों का यह भी कहना है कि यूपीआई के आने से डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल रहा था। छोटे एवं मध्यम वर्ग के व्यवसायियों को खुदरा पैसों के लिए परेशानी नहीं उठानी पड़ रही थी, लेकिन अब इस बदलाव ने आम लोगों को भी परेशानी में डाल दिया है। गौरतलब है कि यूपीआई की नई नीतियों का विरोध स्थानीय बाजारों में साफ तौर पर दिखने लगा है। कई प्रतिष्ठानों के बाहर ‘नो यूपीआई’ के बोर्ड लगाए गए हैं और ग्राहकों को भी शुल्क की चिंता सता रही है।