लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने जनता को झूठ बोलकर डराने की परंपरा शुरू की है। जो योजनाएं आम लोगों के हित में हैं, उन्हें नुकसानदेह बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 15 दिनों तक बेवजह हंगामा किया, लेकिन अगर वास्तव में कोई गड़बड़ी होती तो बिहार की जनता सड़कों पर उतरकर विरोध करती, जो नहीं हुआ।
कांग्रेस लोगों को गुमराह कर रही है
चिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस भावनात्मक मुद्दे उठाकर लोगों को गुमराह कर रही है। महात्मा गांधी के नाम को लेकर बेवजह विवाद खड़ा किया जा रहा है, जबकि समय-समय पर योजनाओं के स्वरूप में बदलाव होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम से इन्हें आपत्ति क्यों है, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में धर्म के आधार पर अत्याचार हो रहा है, लेकिन इस पर विपक्ष चुप्पी साधे हुए है। आगामी चुनावों को लेकर चिराग पासवान ने कहा कि पहले असम और फिर बंगाल में एनडीए अपनी जीत सुनिश्चित करेगा। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का ही असर है कि गठबंधन लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि पार्टी संगठन में भी बदलाव किए जाएंगे और विधायकों की भूमिका को लेकर चर्चा होगी। आने वाले पांच साल को उन्होंने स्वर्णिम काल बताया और कहा कि चुनाव में जाने से पहले सभी जिम्मेदारियों को पूरा किया जाएगा।
खगड़िया रेप मामले पर चिराग पासवान ने कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है और वे खुद को शर्मिंदा महसूस करते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी और समय रहते न्याय होगा। सांसद निधि के खर्च को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि एनडीए को ऐसी किसी जरूरत नहीं है और विपक्ष बेवजह मुद्दे उछाल रहा है।
'राजद और कांग्रेस के विधायक में भारी असंतोष है'
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि राजद और कांग्रेस के विधायकों में भारी असंतोष है। उन्होंने कहा कि जब कोई पार्टी हार के बाद उसकी जिम्मेदारी नहीं लेती, तो कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा होती है। उन्होंने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान उनका गायब रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। परिवार के साथ समय बिताना गलत नहीं है, लेकिन जब सदन चल रहा हो, उस वक्त ऐसे दौरों से बचना चाहिए। जनप्रतिनिधियों की पहली जिम्मेदारी जनता और सदन के प्रति होती है।