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Chhath Puja : छठ पूजा के दौरान बेटे की मन्नत उतारने आए पिता गंगा में डूबे, त्यौहार पर परिवार में छाया मातम

Mon, 27 Oct 2025 11:16 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना बिहटा

सार

Bihar : अचानक लोग चीखने-चिल्लाने लगे। आननफानन में स्थानीय गोताखोर भी गंगा नदी में कूद पड़े, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। अब उस शख्स की मां रो-रोकर कह रही थी कि हे गंगा मैया आपका ही मन्नत पूरा करने आया था मेरा बेटा, फिर तुमने उसे मुझसे क्यों छिन लिया? 
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गंगा नदी में शख्स की तलाश करती एसडीआरएफ की टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पटना में अपने बेटे की मन्नत उतारने और अर्घ्य देने आया एक शख्स गंगा नदी की तेज धारा में बह गया। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कहीं कोई अता-पता नहीं चल पाया। घटना मनेर स्थित सुप्रसिद्ध हल्दी छपरा संगम स्थल की है। स्थानीय लोगों ने इस घटना के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।

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बेटे के मिलने की मां गंगा मैया से लगाती रही गुहार 
पर छठ पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा हुआ है। विक्रम से अपने बेटे की मन्नत उतारने और अर्घ्य देने आए एक युवक गंगा नदी की तेज धारा में डूबकर लापता हो गया। इस घटना के बाद छठ घाट का पूरा माहौल मातम में बदल गया। संगम पर मौजूद अन्य छठव्रतियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। लापता युवक के साथ आए उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उस शख्स की माँ घाट पर छठी मैया से अपने बेटे की कुशलतापूर्वक गंगा में मिलने की कामना करती रही।
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मन्नत उतारने आए थे गंगा घाट
घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि विक्रम प्रखंड के गोविंदपुर निवासी कुणाल किशोर अपनी माँ, पत्नी और दोनों बच्चों के साथ अर्घ्यदान के लिए मनेर के गंगा घाट पर आए थे। कुणाल किशोर ने मन्नत पूरी होने पर जन्मे बेटे की मन्नत उतारने के लिए वेलोग मनेर के हल्दी छपरा संगम घाट पर पहुंचे थे। हल्दी छपरा संगम घाट पर कुणाल किशोर ने अपने दोनों बच्चों और माँ को अर्घ्यदान दिलवाने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेज दिया। अब जब वह स्वयं गंगा स्नान कर बाहर निकलने लगे, तो उनका पैर फिसल गया और वे गंगा नदी में गिर गए। गंगा की धार इतनी तेज थी कि पता ही नहीं चला कि वह कब गहरे पानी में चले गए। फिर घाट पर मौजूद लोगों ने शोरगुल किया तब आसपास मौजूद स्थानीय गोताखोर भी जल्दी से गंगा नदी में कूदे , लेकिन अब तक उनका कहीं अता-पता नहीं चल पाया। स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंगा नदी में अधिक गहराई होने के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। 
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प्रशासन की लापरवाही को बताया जिम्मेदार
स्थानीय लोगों ने इस घटना के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि खतरनाक घाटों पर प्रशासन को बांस-बल्ले लगाकर बैरिकेडिंग करनी चाहिए थी, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को खतरे की जानकारी मिल पाती। लोगों का आरोप है कि यह दुर्घटना जानकारी के अभाव और प्रशासन की अनदेखी के कारण हुई है। उपस्थित लोगों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि गंगा के कटाव को रोकने के लिए लगाए गए जियो बैग्स के पास स्थानीय प्रशासन की ओर से न तो बांस-बल्ले की बैरिकेडिंग की गई थी और न ही खतरनाक घाट की कोई चेतावनी लगाई गई थी। बाहर से आने वाले छठव्रतियों को खतरे का अंदाजा नहीं था और प्रशासन की लापरवाही के चलते वे सभी खतरनाक घाट पर ही पूजा करते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्यदान दे रहे थे, जिसके कारण यह दुखद घटना हुई।

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