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Bihar : बिहार के छह जिलों में 15 मिनट के लिए बत्ती गुल; मगर क्या सफल रहा 'ब्लैक आउट'? देखें पटना का हाल भी

Thu, 14 May 2026 07:18 PM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News : युद्ध की परिस्थिति नहीं है, लेकिन तैयारी रखना देश की सरकार का दायित्व है। युद्ध की परिस्थिति के लिए बिहार में आम नागरिकों की तैयारी की परीक्षा आज छह जिलों में हो रही थी। हर जगह अलार्म तो नहीं सुना गया, मगर बत्ती गुल की गई।
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पटना में विधानसभा के सामने भिखारी ठाकुर पुल के ऊपर और आसपास रोशनी। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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गुरुवार 14 मई को शाम 6:58 बजे शाम बिहार के छह जिलों में अलार्म बजना था। तेज अलार्म। लेकिन, हर जगह यह सुनाई नहीं दिया। गांव की छोड़िए, शहरी क्षेत्रों में भी नहीं। सरकारी बिजली कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और ठीक सात बजे ब्लैक आउट के लिए इन जिलों में बत्ती बंद कर दी। लेकिन, लोग नहीं माने। पटना में भी नहीं। इनवर्टर से बत्तियां जल रही थीं। विधानसभा के सामने के फ्लाईओवर पर भी गाड़ियां तेज रोशनी जलाकर भाग रही थीं। जब युद्ध होता है, तो घर की एक छोटी-सी रोशनी को निशाना बनाकर दुश्मन देश पूरे इलाके को तबाह और बर्बाद कर सकते हैं। एक भी रोशनी दिख गई, तो उस पर निशाना साधने से हजारों लोगों की जान जा सकती है। इसके विपरीत, यदि रोशनी न हो, तो दुश्मन के लिए वह 'अंधेरे में तीर चलाने' जैसा होगा। लेकिन, लोग तैयार नहीं है- साफ दिख गया। आशंकाओं से बचने के लिए 'ब्लैकआउट मॉक ड्रिल' शाम 7 बजे से 7:15 बजे तक किया गया था।

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मॉक ड्रिल के लिए यह छह जिले क्यों चिह्नित?
गुरुवार, 14 मई को बिहार के पटना, किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार में यह मॉक ड्रिल आयोजित गया। राजधानी होने के कारण पटना का महत्व सर्वाधिक है, वहीं औद्योगिक जिला होने के नाते बेगूसराय भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, सीमांचल के चार जिलों- किशजगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार को भी सरकार का विशेष ध्यान है, क्योंकि ये बांग्लादेश के काफी करीब होने के कारण संवेदनशील हैं। 

क्या मोबाइल की रोशनी जला सकते हैं?
इस दौरान हर व्यक्ति को अपने आसपास की तमाम रोशनी बंद करनी थी। बिजली कटने पर इन्वर्टर या इमरजेंसी लाइट भी नहीं जलानी थी। इस दौरान सैटेलाइट के जरिए तस्वीरें भी ली गई होंगी, ताकि यह देखा जा सके कि इन 6 जिलों में ब्लैकआउट कितना प्रभावी रहा। ब्लैकआउट के दौरान बाहर निकलकर मोबाइल का उपयोग करने से भी बचना चाहिए था, क्योंकि सैटेलाइट इमेजिंग में मोबाइल की रोशनी भी पकड़ी जा सकती है। लेकिन, लोग हर जगह लापरवाह नजर आए।
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क्या जांचने के लिए होता है यह पूर्वाभ्यास?
महज 15 मिनट के इस अभ्यास ने दिखा दिया कि किस इलाके के लोग कितने जिम्मेदार हैं?  सरकार ने स्पष्ट किया था कि घबराने की कोई बात नहीं है और फिलहाल युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं है। बिहार में ब्लैकआउट का अभ्यास पहले भी कराया जा चुका है। वर्तमान वैश्विक संकट को देखते हुए एक बार फिर यह परखने की कोशिश की गई कि नागरिक कितने सजग हैं, लेकिन नागरिकों की जागरुकता काफी कम दिखी।

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