Sonnagar-Andal Rail Project: रेल मंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं को मंजूरी रेलवे की जरूरतों, यातायात अनुमान, अंतिम मील कनेक्टिविटी, भीड़भाड़ कम करने, राज्य सरकारों और जनप्रतिनिधियों की मांगों, सामाजिक-आर्थिक लाभ और उपलब्ध धन के आधार पर दी जाती है।
भारतीय रेल ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत पूर्व मध्य रेल और पूर्व रेलवे के बीच डीडीयू मंडल अंतर्गत बिहार के औरंगाबाद के सोननगर-अंडाल (375 किमी) और अंडाल-डानकुनी(160 किमी) मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। संसद के चालू मॉनसून सत्र के दौरान राज्यसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 12,334 करोड़ की लागत वाली सोननगर-अंडाल परियोजना के लिए 977.6 हेक्टेयर में से 95 प्रतिशत से अधिक जमीन का अधिग्रहण का काम पूरा हो गया है और इस उपलब्ध जमीन पर काम भी शुरू हो गया है।
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अंडाल-शक्तिगढ़ के बीच पांचवी-छठी लाइन के लिए डीपीआर तैयार करने को हरी झंडी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अंडाल-डानकुनी खंड में ज्यादातर चार लाइनें होंगी, लेकिन चंदनपुर-शक्तिगढ़(43 किमी) के बीच तीन लाइनें हैं। इस खंड में चौथी लाइन के लिए 700 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। साथ ही, अंडाल-शक्तिगढ़ (91 किमी) के बीच 5वीं और 6वीं लाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने को भी हरी झंडी मिली है।
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परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए किए जा रहे हरसंभव प्रयास
रेल मंत्री ने बताया कि परियोजनाओं के लिए नीति आयोग, वित्त मंत्रालय और राज्य सरकारों से परामर्श व मंजूरी जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि रेल परियोजनाओं के पूरा होने का समय कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे जमीन अधिग्रहण, वन मंजूरी, लागत साझाकरण में राज्य सरकारों का योगदान, कानून-व्यवस्था, मौसम और स्थलाकृतिक परिस्थितियां। फिर भी, रेलवे इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।