राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव काफी दिन बाद आज अपने आवास से बाहर निकले और मीडिया से बातचीत के लिए रूके। उन्होंने चारा घोटाला मामले में प्रतिक्रिया दी। राजद समर्थकों ने लालू के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। आइये जानते हैं पूरा मामला...
चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपनी खुशी जाहिर की। बुधवार को पटना स्थित कौटिल्य नगर आवास से बाहर निकलने पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। मीडिया के सवाल पर लालू यादव ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हां, मैं खुश हूं।"
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले में झारखंड हाई कोर्ट द्वारा दी गई राहत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट का वह आदेश फिलहाल बरकरार रहेगा, जिसके तहत लालू यादव की सजा पर रोक लगाई गई थी और उन्हें जमानत का लाभ मिला था। शीर्ष अदालत ने साथ ही झारखंड हाई कोर्ट को लंबित आपराधिक अपील का छह महीने के भीतर निस्तारण करने का निर्देश भी दिया है।
'लंबित अपील पर अब शीघ्र फैसला होना चाहिए'
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट का आदेश कई वर्षों से प्रभावी है और इस चरण में उसमें दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता। अदालत ने यह भी माना कि वर्ष 2018 से लंबित अपील पर अब शीघ्र फैसला होना चाहिए, ताकि मामले का अंतिम निपटारा हो सके।
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'सजा निलंबन का लाभ गलत आधार पर मिला है'
मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि लालू यादव को सजा निलंबन का लाभ गलत आधार पर मिला है। एजेंसी का कहना था कि अलग-अलग मामलों में सुनाई गई सजाओं की गणना क्रमवार होनी चाहिए, इसलिए आधी सजा पूरी होने का आधार सही नहीं है।
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लालू की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
वहीं, लालू प्रसाद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी या अलग-अलग, इसका फैसला अंतिम अपील की सुनवाई के दौरान होना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने अपने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए वही राहत दी थी, जो इसी तरह के अन्य मामलों में भी दी जाती रही है।