बिहार में नीतीश कुमार सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक के खिलाफ मंगलवार को सड़क से सदन तक राजद के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने सदन से सड़क तक जमकर हंगामा किया।
विधानसभा में विधायकों ने स्पीकर विजय सिन्हा का चैंबर घेर लिया और उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की। इस दौरान मार्शलों और विधायकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। सदन के अंदर स्टेट रैपिड एक्शन फोर्स बुलानी पड़ी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनके साथी विधायकों और जवानों के बीच हाथापाई हुई, इसके बाद तेजस्वी पीछे हटे। हाथापाई में कई विधायक घायल हैं। हंगामा करने वाले विधायकों को वेल से उठाकर मार्शलों ने सदन से बाहर किया।
विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार को शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने जमकर बवाल किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। दोपहर बाद करीब तीन बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी विधायकों ने रिपोर्टर टेबल को तोड़ दिया। विधानसभा के सचिव की कुर्सी हटा दी।
शाम 6:15 बजे विपक्ष की महिला विधायकों ने आसन को घेरकर हंगामा शुरू किया। स्पीकर की कुर्सी को महिला विधायकों ने घेर लिया। उनकी पूरी कोशिश रही कि स्पीकर कुर्सी पर न बैंठे। महिला विधायकों को महिला पुलिस ने उठाकर विधानसभा के बाहर कर दिया। इससे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर का विपक्षी विधायकों ने घेराव किया। विपक्षी नेताओं ने स्पीकर को बंधक बनाने की कोशिश की।
दिनभर विधानसभा में हंगामा होता रहा। चार बार सदन को स्थगित करना पड़ा। छह बार विधानसभा की कार्यवाही के लिए घंटी बजाई गई, लेकिन शुरू नहीं हो सकी। इस दौरान मकदुमपुर से राजद विधायक सतीश कुमार दास कुछ समय के लिए अचेत हो गए। सीएम नीतीश कुमार के भाषण के बाद बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021 को पास कर दिया गया। दरअसल, इस कानून से पुलिस को और ज्यादा ताकत मिल जाएगी और वह बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकेगी।
तेजस्वी और तेज प्रताप हिरासत में लिए गए
कार्यवाही शुरू होते ही बिल की कॉपी को लहराते हुए राजद के विधायक एवं भाकपा माले के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर कहा कि योगी सरकार का कानून बिहार में किसी भी शर्तों पर लागू नहीं होगा। प्रशासन की मनाही के बावजूद राजद नेता काफी संख्या में जेपी गोलंबर के पास जमा हुए और वहां से विधानसभा के लिए रवाना हो गए। विपक्ष के नेता तेजस्वी और तेज प्रताप के नेतृत्व में मार्च जेपी गोलंबर से निकलकर डाकबंगला चौराहे के पास पहुंची।
राजद कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की ओर से लगाई बैरिकेडिंग को तोड़ दिया। इसके बाद, राजद कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच जबरदस्त झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। आखिरकार पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। जिसके बाद राजद कार्यकर्ताओं ने पथराव शुरू कर दिया। इसमें एक पत्रकार समेत कई लोगों को चोटें आई हैं। इस पूरे हंगामे के बाद पुलिस ने भी बल प्रयोग किया। साथ ही स्थिति को संभालने के लिए तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
समाजवाद के नाम पर कलंक हैं नीतीश: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि 'नीतीश कुमार समाजवाद के नाम पर कलंक हैं। लोहिया जयंती के दिन सड़क पर हमारे साथ नौकरी मांग रहे बेरोजगारों पर लाठीचार्ज और पत्थरबाजी करवाते हैं और उसी दिन सदन में काला पुलिसिया कानून लेकर आते है। हम इनकी गुंडागर्दी नहीं चलने देंगे। चलाओ गोली मर्द हो तो।'
सदन में जो हुआ, पहले कभी नहीं हुआ: नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 'बिल को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है। अपराध को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कार्रवाई करेगी। हम चाहते थे कि सदन में बहस करें, मगर अफवाह फैलाई जा रही है। विपक्ष बहस करता तो सरकार जवाब देती। विपक्ष को चर्चा में भाग लेना चाहिए। सदन में जो हुआ है, वह आज से पहले नहीं हुआ। विधानसभा में पता होना चाहिए कि क्या व्यवहार करना चाहिए।'
नीतीश कुमार शर्म करो: लालू
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कहा कि 'लोहिया जयंती के दिन कुकर्मी आदमी कुकर्म नहीं करेगा तो कुकर्मी कैसे कहलाएगा? उसे शर्म आनी चाहिए, सदन के अंदर निर्वाचित माननीय सदस्यों को पिटवा रहा है? अगर पुलिस सदन के अंदर विधायकों को पीट सकती है तो उनके घर जाकर क्या करेगी? नीतीश कुमार शर्म करो।'