शिक्षा विभाग के बजट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पक्ष में बोलते हुए भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने लालू-राबड़ी राज की याद दिलाई। उन्होने बिना नाम लिए राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र से कर दी। उन्होंने कहा कि जब मैं 2005 से पहले के बिहार को याद करती हूं तो मुझे महाभारत के धृतराष्ट्र की याद आती है। वह अंधे थे। वह देखना भी नहीं चाहते थे। उन्हें हस्तिनापुर की चिंता नहीं बल्कि दुर्योधन की चिंता रहती थी। जब बेटियां स्कूल जाने से डरती थी, सरकारी स्कूल के नाम पर टूटी फूटी दीवारें थीं। जब शिक्षक वेतन के लिए भटकते रहते थे। बच्चे भूखे पेट स्कूल जाने पर मजबूर थे। जनता रोती थी। वह कहती रहती थी कि बिहार पिछड़ रहा है, तब भी इनका दिल नहीं पसीजा। 2005 से पहले ऐसा ही अंधेरा था। स्कूल में ताले लगे रहते थे। बजट आता तो था लेकिन जनता तक पहुंचता नहीं था। रिपोर्ट में विद्यालय थे लेकिन जमीन पर घास उगते रहते थे। हमारी विपक्ष के साथ भी उस वक्त के साक्षी रहे हैं। जो बीत गई सो बात गई। इतिहास कभी उन्हें माफ नहीं करेगी।
2005 से पहले घर से निकलने में डर लगता था
उन्होंने विधायक गौतम कृष्ण पर तंज कसते हुए कहा कि बीडीओ साहब आप दिल पर हाथ रखकर बोलिये कि क्या मैं जो बोल रही हूं वह झूठ बोल रही हूं? उन्होंने कहा कि मैं कलाकार हूं। अब निडर होकर रात में तीन बजे दरभंगा से निकली और पटना समय से पहुंच गई। वो भी सुरक्षित। 2005 से पहले शाम छह बजे से पहले घर से निकलने में डर लगता था। उन्होंने शिक्षा के बजट की तारीफ की। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने शिक्षा को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि अपने विधानसभा में नए स्कूल भवन और कमरों को बढ़ाने की मांग की।