Bihar Vidhan Sabha: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में पहली बार मैथिली ठाकुर ने जो भाषण दिया, उसकी चर्चा खूब रही है। 25 साल की मैथिली के भाषण की सत्ता पक्ष के विधायकों ने तारीफ की। इस दौरान विपक्ष के विधायकों ने उनकी बातों से असहमति भी जताई। आइए जानते हैं सदन में विधायक मैथिली ठाकुर ने क्या कहा?
शिक्षा विभाग के बजट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के पक्ष में बोलते हुए भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने लालू-राबड़ी राज की याद दिलाई। उन्होने बिना नाम लिए राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद की तुलना महाभारत के धृतराष्ट्र से कर दी। उन्होंने कहा कि जब मैं 2005 से पहले के बिहार को याद करती हूं तो मुझे महाभारत के धृतराष्ट्र की याद आती है। वह अंधे थे। वह देखना भी नहीं चाहते थे। उन्हें हस्तिनापुर की चिंता नहीं बल्कि दुर्योधन की चिंता रहती थी। जब बेटियां स्कूल जाने से डरती थी, सरकारी स्कूल के नाम पर टूटी फूटी दीवारें थीं। जब शिक्षक वेतन के लिए भटकते रहते थे। बच्चे भूखे पेट स्कूल जाने पर मजबूर थे। जनता रोती थी। वह कहती रहती थी कि बिहार पिछड़ रहा है, तब भी इनका दिल नहीं पसीजा। 2005 से पहले ऐसा ही अंधेरा था। स्कूल में ताले लगे रहते थे। बजट आता तो था लेकिन जनता तक पहुंचता नहीं था। रिपोर्ट में विद्यालय थे लेकिन जमीन पर घास उगते रहते थे। हमारी विपक्ष के साथ भी उस वक्त के साक्षी रहे हैं। जो बीत गई सो बात गई। इतिहास कभी उन्हें माफ नहीं करेगी।
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जंगलराज से सुशासन की ओर बिहार बढ़ा है
मैथिली ठाकुर 2005 में एक नवोदय हुआ। नया सूरज उगा। 2005 बिहार की जनता ने ऐतिहासिक फैसला लिया। उस फैसले का नाम था नीतीश कुमार। जब महाभारत दुर्योधन का अंत हुआ और युधिष्ठिर गद्दी पर बैठे तो धर्म की स्थापना हुई। उसी तरह जब नीतीश कुमार गद्दी पर बैठे तो यहां सुशासन आया। भय से आत्मविश्वास, अपमान से सम्मान और जंगलराज से सुशासन की ओर बिहार बढ़ा है। उन्होंने सीएम नीतीश कुमार की साइकिल योजना का जिक्र किया। कहा कि साइकिल योजना के कारण दीदियों ने साइकिल से स्कूल जाना शुरू किया। विपक्ष के लोग विरोध करते रहे थे लेकिन उसी योजना की चर्चा देश में हुई। बिहार की बेटियों का दुख दर्द सीएम नीतीश कुमार ने समझा। उन्होंने लाखों बेटियों का भविष्य संवारा। अगर मैं 2005 से तुलना करु तो मैं यहां नहीं रह पाती।
2005 से पहले घर से निकलने में डर लगता था
उन्होंने विधायक गौतम कृष्ण पर तंज कसते हुए कहा कि बीडीओ साहब आप दिल पर हाथ रखकर बोलिये कि क्या मैं जो बोल रही हूं वह झूठ बोल रही हूं? उन्होंने कहा कि मैं कलाकार हूं। अब निडर होकर रात में तीन बजे दरभंगा से निकली और पटना समय से पहुंच गई। वो भी सुरक्षित। 2005 से पहले शाम छह बजे से पहले घर से निकलने में डर लगता था। उन्होंने शिक्षा के बजट की तारीफ की। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने शिक्षा को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि अपने विधानसभा में नए स्कूल भवन और कमरों को बढ़ाने की मांग की।