बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज (BIES) पटना एवं अलायंस फॉर टोबैको फ्री बिहार द्वारा राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने की कोशिश विषय पर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। BIES के निदेशक डॉ. प्यारे लाल ने कार्यक्रम में मौजूद सभी गणमान्य एवं अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन देश की सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या है। प्रति वर्ष भारत में तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों से लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो रही है। यह देश की उत्पादकता और अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है।
100 में से 40 रोगी तंबाकू सेवन के कारण मरते हैं
SEEDS के सचिव दीपक मिश्रा ने कहा कि भारत में कैंसर से मरने वाले 100 रोगियों में से 40 रोगी तंबाकू सेवन के कारण मरते हैं। लगभग 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर तंबाकू का सेवन करने वालों को होता है। WHO के अनुमान के मुताबिक, धूम्रपान करने वालों में टीबी की बीमारी का खतरा कई गुणा ज्यादा होता है। तंबाकू उपयोग के खतरों से हमलारी वर्तमान एवं भावी पीढ़ी को बचाने के लिए हमारा ध्यान बच्चों और युवा वर्ग पर लगाना होगा। ताकि वह तंबाकू उद्योग के लुभावने विज्ञापन के बहकावे में आकर तंबाकू जैसे विषैले चीज का सेवन भूल से भी न करें। इसलिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर स्कूल और कॉलेज में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम चलाना होगा। जिससे बच्चों और युवाओं को जागरुक किया जा सके।
बिहार में तंबाकू संवन करने वाले 25.9 प्रतिशत हो गए
SEEDS के सचिव दीपक मिश्रा बिहार सरकार ने सरकारी भवनों तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करते हुए सार्वजनिक स्थलों पर यत्र-तत्र न थूकने पर रोक लगा दी है। इससे किसी तरह के महामारी फैलने पर रोक लग सकती है। साथ ही स्वच्छ परिवेश का निर्माण होने में कारगर साबित होगा। बिहार सकार और गैर सरकारी संस्थान के प्रयास से पिछले 12 साल से राज्य एवं जिला स्तर पर तंबाकू को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। इससे फायदा यह हुआ कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में तंबाकू संवन करने वालों का प्रतिशत 53.5% से घटकर 25.9% हो गया। कार्यक्रम में बिहार यक्ष्मा संघ के महासचिव डॉ. आशिफ रजा, कैंसर विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह, तकनीकि सलाहकार डॉ. अमित यादव, डॉ. सरिता शिवांगी, डॉ. कुमकुम नारायण, डॉ. सौरव, रघुवीर मोची और चितरंजन सहाय मौजूद थे।