नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (फाइल)
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बिहार में एक बार फिर सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO) की ऑनलाइन परीक्षा का पेपर लीक हो गया, जिससे यह परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इस घटना ने राज्य में एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने इसे ‘सत्ता संरक्षित माफिया’ की कारस्तानी बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पेपर लीक पर उठे गंभीर सवाल
इस लीक ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बिहार में परीक्षाओं की साफ-सुथरी प्रक्रिया पर भी संदेह पैदा कर दिया है। आरोप है कि BJP-JDU गठबंधन सरकार के संरक्षण में पेपर लीक माफिया सक्रिय हैं, जो हर बड़ी परीक्षा में गड़बड़ी कर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
सरकार पर विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा में गड़बड़ी हुई हो। राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि राज्य में हो रही अधिकतर परीक्षाओं के पेपर लीक के तार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले से जुड़े रहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री कभी इन घटनाओं पर खुलकर बोलते क्यों नहीं हैं?
रद्द की गई परीक्षाओं की लंबी सूची
बिहार में हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं, जिनमें BPSC, STET और अब CHO परीक्षा शामिल है। हर बार लीक का खुलासा होने के बाद परीक्षाएं रद्द की जाती हैं, लेकिन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अभाव रहा है।
क्या कहती है सरकार?
सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने परीक्षा रद्द करने का कारण बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। इधर, परीक्षार्थियों और उनके परिवारों में गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि मेहनत और तैयारी के बावजूद ऐसी घटनाओं से उनका भविष्य अधर में लटक जाता है। कई छात्र संगठनों ने पारदर्शी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।