पटना में मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री सचिवालय के आवेदन प्राप्ति केंद्र और 'सहयोग पथ' का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का मकसद उन लोगों की शिकायतों का दोबारा निपटारा करना है, जिनकी समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर नहीं हो पाया या जिनके फैसलों पर उन्हें आपत्ति है।
पहले ही दिन 129 आवेदन पहुंचे
राज्य स्तरीय सहयोग शिविर के पहले दिन कुल 129 आवेदन दर्ज किए गए। इनमें से 100 आवेदक खुद उपस्थित हुए और उनके मामलों पर सुनवाई की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर शिकायत का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
लाभार्थियों ने समाधान पर जताया संतोष
कार्यक्रम के दौरान जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, शेखपुरा, सीवान, अररिया, भागलपुर और पश्चिम चंपारण समेत कई जिलों से आए लोगों ने अपनी समस्याओं के समाधान पर सरकार का आभार जताया।
सोलर योजना का प्रचार बढ़ाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री सोलर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। यदि इससे अधिक बिजली का उत्पादन होता है तो उपभोक्ताओं को उसका आर्थिक लाभ भी मिलेगा। उन्होंने लोगों से अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाने की अपील की और दूर-दराज के गांवों को सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की बात कही।
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पेंशन और सड़क निर्माण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पात्र लोगों को अब तक पेंशन नहीं मिली है या जिनके आवेदन लंबित हैं, उन्हें अगले महीने की 10 तारीख तक पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि बरसात के बाद नई सड़कों के निर्माण का काम तेजी से पूरा किया जाए।
अधूरे दस्तावेज के कारण आवेदन न करें खारिज
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी आवेदन में दस्तावेज कम हों तो उसे सीधे खारिज न किया जाए। पहले संबंधित आवेदक को नोटिस देकर जरूरी दस्तावेज जमा करने का मौका दिया जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सिर्फ तकनीकी कारणों से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रह जाए।
30 दिनों में शिकायतों के समाधान का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहयोग कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का 30 दिनों के भीतर समाधान करना है। उन्होंने कहा कि यदि कोई शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच रही है, तो इसका मतलब है कि निचले स्तर पर उसका सही तरीके से निपटारा नहीं हुआ। उन्होंने सीओ, बीडीओ, एसडीओ, डीसीएलआर, जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारियों को शिकायतों की नियमित समीक्षा कर समय पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोग शिविरों के जरिए अब तक करीब 90 प्रतिशत शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर व्यक्ति तक न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है तथा यही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।
राजस्व कर्मचारी निलंबित
राज्य स्तरीय सहयोग शिविर में वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड की पीरापुर मथुरा पंचायत निवासी उमेश कुमार ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायत रखी। उन्होंने बताया कि सहयोग पोर्टल पर दर्ज दाखिल-खारिज से जुड़े उनके चार मामलों (वाद संख्या 739, 740, 741 और 742/2026-27) का लंबे समय से निपटारा नहीं हो रहा था।
शिकायत मिलते ही संबंधित मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। जांच के दौरान पता चला कि गोरौल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी राजू कुमार ने इन मामलों के निपटारे में अनावश्यक देरी की थी। राज्य स्तरीय सहयोग शिविर में इसकी पुष्टि होने के बाद राजू कुमार को निलंबित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आम लोगों की शिकायतों का तय समय सीमा के भीतर और पूरी गुणवत्ता के साथ समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला प्रशासन ने भी साफ किया है कि सहयोग शिविर से जुड़े मामलों के निपटारे में किसी तरह की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में शिथिलता बरतता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।