बिहार को बाल श्रम मुक्त राज्य बनाने की दिशा में श्रम संसाधन विभाग एक विशेष राज्यव्यापी अभियान चलाने जा रहा है। इसके तहत ईंट-भट्टों, कारखानों और घरों में कार्यरत बच्चों की पहचान कर उन्हें मुक्त कराया जाएगा। साथ ही पूरे राज्य में बाल श्रम, बाल विवाह, बाल अधिकार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर पंचायत स्तर तक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
यह निर्णय सोमवार को राजधानी पटना स्थित नियोजन भवन के मंथन सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार ने की। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, विधायक श्रेयसी सिंह, रामविलास कामत, विधान पार्षद विजय सिंह, अनिल कुमार, रविंद्र प्रसाद सिंह, सदस्य सुशील कुमार, शौकत अली, राजेश भारती सहित श्रमायुक्त, आयोग के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पारंपरिक मेलों के माध्यम से चलेगा जागरूकता अभियान
ईंट-भट्टों पर विशेष छापेमारी अभियान
अभिभावकों को योजनाओं की जानकारी देने का निर्देश
उन्होंने कहा कि सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन बाल श्रम का प्रमुख कारण है। इसलिए जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है। विभाग के अधिकारी स्कूलों में जाकर बच्चों के माता-पिता को श्रम विभाग की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दें ताकि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें, न कि काम पर।
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी जागरूकता
बैठक में यह भी तय किया गया कि सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रखंड और पंचायत स्तर पर सूचना बूथ, कला और शिल्प गतिविधियां, कार्यशालाएं तथा व्यक्तिगत कहानियों के जरिए भी बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाएगी। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बाल श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल मजदूरी कराते पकड़े जाने पर छह माह से लेकर दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।