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Bihar Polls: चार किरदार तय करेंगे कौन बनेगा सरदार; ओवैसी, पीके और तेजप्रताप के प्रदर्शन पर टिकीं सबकी निगाहें

सार

एआईएमआईएम का ब्रांड ओवैसी विपक्षी महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी है। बीते चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल की पांच सीटें जीत कर पार्टी ने विपक्षी महागठबंधन को करारा झटका दिया था। इस बार यह पार्टी सीमांचल के अतिरिक्त करीब-करीब सभी मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
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बिहार विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार चुनाव में मुकाबला एक बार फिर से सत्तारूढ़ राजग और विपक्षी गठबंधन के बीच है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीते चुनाव की तरह ही दोनों गठबंधनों के बीच कांटे का मुकाबला है। दोनों गठबंधनों के पास समान अवसर, समान चुनौतियां और बराबर ताकत है। चूंकि, मुकाबला कांटे का है, ऐसे में इस चुनाव में चार किरदार जनसुराज पार्टी, जनशक्ति जनता दल, एआईएमआईएम और युवा तय करेंगे कि इस बार जनादेश का चुनावी पलड़ा किस गठबंधन की ओर झुकेगा।

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इन चार किरदारों में से दो एआईएमआईएम और युवा शक्ति ने बीते चुनाव में दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधनों को अपनी ताकत का अहसास कराया था। इनमें युवाओं की नाराजगी ने विपक्षी महागठबंधन को सत्ता की दहलीज पर पहुंचा दिया था, जबकि एआईएमआईएम ने अपने प्रदर्शन से इस महागठबंधन के मुंह से जीत का निवाला छीन लिया था। इस बार एआईएमआईएम पहले से अधिक संगठित और आक्रामक हो कर सीमांचल के इतर अन्य मुसलमान प्रभाव वाली सीटों पर खम ठोक रहा है तो जनसुराज पार्टी और जनशक्ति जनता दल इस चुनाव के नए  किरदार हैं।

एआईएमआईएम का फायरब्रांड ओवैसी
एआईएमआईएम का ब्रांड ओवैसी विपक्षी महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी है। बीते चुनाव में मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल की पांच सीटें जीत कर पार्टी ने विपक्षी महागठबंधन को करारा झटका दिया था। इस बार यह पार्टी सीमांचल के अतिरिक्त करीब-करीब सभी मुस्लिम प्रभाव वाली सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ओवैसी के मुद्दे युवा मुसलमानों को प्रभावित कर रहे हैं। खासकर विपक्षी महागठबंधन के करीब 18 फीसदी आबादी वाली बिरादरी से डिप्टी सीएम पद का उम्मीदवार न बनाने को एआईएमआईएम ने अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना लिया है। जाहिर है इस पार्टी को मिलने वाला एक-एक वोट विपक्षी महागठबंधन की जीत की संभावनाओं पर ग्रहण लगाने वाला साबित हो सकता है।

युवा शक्ति निर्णायक
बिहार के 40 फीसदी मतदाता युवा हैं। इनमें 29 साल से कम आयुवर्ग की हिस्सेदारी एक चौथाई से ज्यादा है। बीते चुनाव में इसी वर्ग की नाराजगी ने विपक्षी महागठबंधन को सत्तारूढ़ राजग के साथ कांटे की टक्कर का अवसर उपलब्ध कराया था। परिणाम बताते हैं कि दोनों गठबंधनों के बीच कुल वोटों का अंतर महज कुछ हजार का था। इस बार भी इस वर्ग में रोजगार और पलायन सबसे बड़ा मुद्दा है। विपक्षी महागठबंधन हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तो राजग एक करोड़ रोजगार का वादा कर युवा शक्ति का साथ हासिल करने में जुटा है।

जनसुराज ने भी कराया मौजूदगी का अहसास
चुनावी रणनीतिकार से प्रत्यक्ष राजनीति में कूदे प्रशांत किशोर ने अपनी जनसुराज पार्टी के जरिये बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा की है। उनके उठाए पलायन, बेरोजगारी, बदहाल शिक्षा-चिकित्सा व्यवस्था की गूंज चुनाव प्रचार में प्रमुखता से सुनी जा रही है। उनकी ओर से सत्तारूढ़ नेताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले ने सत्तारूढ़ राजग को हलकान किया है। खासतौर पर शहरी युवाओं में प्रशांत के लिए खास आकर्षण दिखता है।

तेजप्रताप का तेज
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव भी इस चुनाव का एक अहम किरदार हैं। जनशक्ति जनता दल का गठन कर चुनाव मैदान में उतरे तेजप्रताप के निशाने पर अपना ही परिवार व पार्टी है। वह विपक्षी महागठबंधन के हर मुद्दे की हवा निकालने में जुटे हैं। उनकी रणनीति अपने उम्मीदवारों के माध्यम से राजद को झटका देने की है। तेजप्रताप की इस नई जंग में लालू परिवार बंटा दिखता है। मां राबड़ी के दिल में उनके लिए सहानुभूति है। तेजस्वी व तेजप्रताप एक-दूसरे पर सीधा हमला कर रहे हैं।

राजग की ताकत
  •  नीतीश-मोदी के रूप में गठबंधन का सशक्त चेहरा।
  •  महिला वोट बैंक में इस जोड़ी  की स्वीकार्यता, जंगलराज बनाम सुशासन की चिर-परिचित नारे को अतीत में मिली सफलता।
  •  गैर-यादव ओबीसी, अगड़ा, ईबीसी, दलित-महादलित वर्ग का मजबूत नेतृत्व, नीतीश की स्वच्छ छवि।

राजग की चुनौतियां
  •  सीएम नीतीश का स्वास्थ्य।
  •   दो दशक तक सीएम रहने के कारण एंटी इन्कम्बेंसी, सीएम उम्मीदवार को लेकर भ्रम।
  •   पीएम की जनसभाओं और रोड शो से सीएम की दूरी।
  •  युवा शक्ति की विराट महत्वाकांक्षा।
 
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महागठबंधन की ताकत
  • तेजस्वी के नाम पर महागठबंधन में बनी सहमति।
  •  एमवाई समीकरण का मजबूत समर्थन, सहनी को डिप्टी सीएम का उम्मीदवार बनाने के कारण एम का डबल डोज।
  •  नीतीश सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी, युवा शक्ति का समर्थन।

महागठबंधन की चुनौतियां
  • एक दर्जन सीटों पर फ्रैंडली फाइट, जिससे सबकुछ ठीक न होने का संदेश, लालू-राबड़ी शासनकाल के दौरान जंगलराज की छाप।
  •  लालू परिवार में खटपट।
  •  मुसलमान वोट बैंक के कई नए दावेदार। मुस्लिम-यादव वोट बैंक पर अत्यधिक भरोसा।
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