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बिहार: लालू की रिहाई के साथ ही बढ़ेंगी भाजपा-जदयू सरकार की चुनौतियां

Sun, 18 Apr 2021 03:13 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, पटना

सार

  • लालू अभी भी निर्विवाद रूप से बिहार के सबसे लोकप्रिय नेता
  • पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा-जदयू ने अपनी सारी ताकत झोंकी, लेकिन राजद को विधानसभा में सबसे बड़ा दल बनने से नहीं रोक पाए
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लालू प्रसाद यादव - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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दुमका कोषागार मामले में लालू यादव को जमानत मिलने के साथ ही भाजपा-जदयू की सरकार की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। इतना तय है कि लालू प्रसाद के जेल से बाहर आने के बाद सियासी समीकरणों में बदलाव के आसार बढ़ गए हैं। लालू अभी भी निर्विवाद रूप से बिहार के सबसे लोकप्रिय नेता हैं।

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बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा-जदयू ने अपनी सारी ताकत झोंकी। तमाम बड़े नेताओं ने कई रैलियां कीं लेकिन राजद को विधानसभा में सबसे बड़ा दल बनने से नहीं रोक पाए। लालू के जेल में रहने के बावजूद राजद ने 74 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कहा जाता है कि अगर लालू जेल से बाहर होते तो राजद को आठ से दस और सीटों का फायदा होता। साथ ही कांग्रेस की सीटें भी बढ़ती।

जानकारों की मानें तो लालू के जेल से बाहर आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिक्कतें बढ़ेंगी। अब चाचा भतीजे की नहीं बड़े भाई छोटे भाई की बात होगी। साथ ही पक्ष और विपक्ष की जमकर तकरार भी होगी। दूसरी तरफ राजद के कई बड़े नेता भी बड़े बदलाव के पैरोकार हैं और उन्हें भी लालू प्रसाद के जेल से निकलने का इंतजार था। इन नेताओं में एक धड़ा कांग्रेस से राजद के गठबंधन का विरोधी है तो दूसरा समर्थक। पार्टी के बुजुर्ग नेताओं के साथ लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के रिश्तों को लेकर भी अंदरखाने में खींचतान बनी हुई है।
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लालू की रिहाई का जितना इंतजार राजद को था, उतना ही कांग्रेस को भी। इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता कि बिहार कांग्रेस में बड़ी संख्या में वैसे नेता हैं जिनका लालू से सीधा जुड़ाव है। पटना के सियासी गलियारे में इन्हें कांग्रेस के राजद नेता कहा जाता है। लेकिन पार्टी में ऐसे लोगों की कमी भी नहीं है जो पार्टी को अकले दम पर खड़ा करने के पैरोकार हैं।

कांग्रेस की मुश्किल ये है कि पार्टी में बड़ी संख्या में लालू प्रसाद के करीबी तो हैं हीं, नीतीश कुमार से सीधे संपर्क वाले भी कई नेता हैं। वहीं पार्टी के प्रदेश प्रभारी भक्त चरण दास अपनी हर बिहार यात्रा पर तेजस्वी यादव से मुलाकात कर मजबूत गठबंधन के संकेत दे रहे हैं। हलांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी कहते हैं कि  गठबंधन नेतृत्व का फैसला होता और दलों के भीतर आपसी विचार-विमर्श जीवंतता की निशानी है, मतभेद की नहीं।

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