मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में राजस्व विभाग द्वारा प्रकाशित ‘गजेटियर-कम-एटलस ऑफ वाटर बॉडीज’ की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, पूर्णिया और कोसी प्रमंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, सहरसा, सुपौल और मधेपुरा के जिला गजेटियरों की पांडुलिपियों के निर्माण की योजना पर भी विचार किया गया।
बैठक में राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने जानकारी दी कि विभाग ने हाल ही में पटना और दरभंगा जिलों के गजेटियर का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। अब शेष सात जिलों के गजेटियरों के निर्माण के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट, नई दिल्ली का सहयोग लिया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि जिला गजेटियर किसी भी जिले की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति को जानने का एक महत्वपूर्ण स्रोत होता है। इसी उद्देश्य से राज्य स्तर पर एक सलाहकार समिति का गठन किया गया है, जिसमें इतिहास, पर्यावरण, पुरातत्व, भूगोल सहित विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
उन्होंने सभी जिलों के जिलाधिकारियों से अनुरोध किया कि वे जिला स्तर पर भी ऐसी ही सलाहकार समितियों का गठन करें, जिससे जिलों के गजेटियरों के निर्माण में स्थानीय जानकारी जुटाने में सहायता मिले। इसके लिए विभाग द्वारा विशेषज्ञों की टीमें इन जिलों में भेजी जाएंगी जो संबंधित अधिकारियों, शिक्षाविदों, पत्रकारों तथा स्थानीय जानकार लोगों से जानकारी एकत्र करेंगी। इस जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी अभिलेखों से तथ्यों का संकलन किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि एक वर्ष के भीतर इन सातों जिलों के गजेटियरों का प्रकाशन कर लिया जाए।
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बैठक में यह भी बताया गया कि विभाग ने हाल ही में ‘गजेटियर-कम-एटलस ऑफ वाटर बॉडीज’ नामक पुस्तक प्रकाशित की है, जिस पर वर्ष 2020 से कार्य चल रहा था। इस वाटर एटलस के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकेगा। साथ ही यह आर्द्रभूमि संरक्षण विशेष रूप से बिहार की तीन रामसर साइट्स: कांवर झील (बेगूसराय), नागी झील (जमुई), और नकटी झील (जमुई) के संरक्षण तथा बाढ़ प्रबंधन में भी उपयोगी सिद्ध होगा।
विभिन्न विभाग जैसे कि ग्रामीण विकास, पर्यटन, जल संसाधन और पर्यावरण विभाग भी इस एटलस से लाभान्वित होंगे। विभाग द्वारा जल्द ही ब्लॉक स्तर के मानचित्रों का निर्माण कर जिलों को उपलब्ध कराया जाएगा। किसी विशेष आवश्यकता पर आधारित जानकारी की मांग होने पर वाटर एटलस को अद्यतन कर संबंधित विभाग या जिले को आवश्यक डेटा प्रदान किया जाएगा। मुख्य सचिव ने इस एटलस की उपयोगिता को और अधिक बढ़ाने के लिए कई सुझाव भी दिए, जिन्हें शीघ्र ही लागू किया जाएगा। इस अवसर पर आयोजित बैठक में राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव, सचिव और विशेष सचिव के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, निदेशक तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता (राजस्व) भी उपस्थित थे।