कॉर्डियो एक्सरसाइज को बहुत अच्छा माना जाता है, जिसमें दौड़ना भी शामिल है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अत्यधिक दौड़ना आपके घुटनों की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। यह कहना है पटना में तीन दिन के लिए जुटे हड्डी रोग विशेषज्ञों का।
बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन बोआकॉन-2025 में 'नी ऑर्थोप्लास्टी वर्कशॉप' में बोलते हुए डॉ. संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बहुत ज्यादा दौड़ने से घुटना में समस्या हो सकती है। इसलिए लिमिट में ही दौड़े। खिलाड़ियों के साथ घुटना की समस्या ज्यादा होती है। मेरे पास ऐसे केस काफी आ रहे हैं। घुटना का ऑथराइटिस की समस्या व्यायाम से काफी हद तक दूर की जा सकती है। वैसे अब नी ऑर्थोप्लास्टी के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी एक्युरेशी काफी ज्यादा है। डॉ. संजय कुमार सिन्हा फिलहाल यूनाइटेड किंगडम में सेवा दे रहे हैं।
'नी ऑर्थोप्लास्टी वर्कशॉप' में कोलकाता के डॉ. बीडी चटर्जी, डॉ. आशीष सिंह, डॉ. अश्विनी गौरव, डॉ. कुमार शशिकांत, डॉ. रत्नेश सिंह और डॉ. निशिकांत ने अपनी प्रस्तुति दी। आयोजन समिति के सचिव डॉ. महेश प्रसाद ने बताया कि अशोक इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में यह कार्यक्रम हो रहा है। 15 फरवरी शाम सात बजे इसका औपचारिक उद़्घाटन होगा। जबकि समापन 16 फरवरी को होगा। तीन दिन में दो दर्जन से ज्यादा तकनीकी सत्र होने हैं। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए 500 से ज्यादा डॉक्टर आए हुए हैं। आयोजन समिति में अध्यक्ष डॉ, भरत प्रसाद सिंह, सचिव डॉ. महेश प्रसाद, रिसेप्शन कमिटी के सचिव डॉ. एके सिन्हा, संयोजक डॉ. राजीव आनंद और कोषाध्यक्ष डॉ. आयुष कुमार हैं।
स्पाइन टीबी में स्वच्छता महत्वपूर्ण : डॉ महेश
स्पाइन वर्कशॉप में पीएमसीएच के स्पाइन सर्जन और बोआकॉन-25 के आयोजन समिति के सचिव डॉ. (प्रो) महेश प्रसाद ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्पाइन सर्जरी में इसके फिक्सेसन के लिए पेडिकल स्क्रू बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि थोड़ी सी लापरवाही हुई तो मरीज दिव्यांग हो सकता है। क्योंकि स्पाइन के चारों ओर महत्वपूर्ण अंग और नर्व होते हैं। उन्होंने कहा कि स्पाइन टीबी का बड़ा कारण अस्वच्छता है। स्पाइन टीबी फेफड़ा से शुरू होता है और स्पाइन तक पहुंच जाता है। व्यक्ति का रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से भी स्पाइन टीबी होता है।
गरीबों में यह ज्यादा देखा जाता है। स्पाइन की समस्या का सबसे बड़ा कारण इंज्युरी है। मेरे पास स्पाइन के ज्यादातर केस इंज्युरी वाले ही आते हैं। इस सेशन के कंवेनर डॉ. गौतम आर प्रसाद और डॉ. महेश प्रसाद थे। जबकि केस की प्रस्तुति पारस हॉस्पिटल के डॉ. गौतम आर प्रसाद, इंडियन स्पाइन इंजरी सेंटर, दिल्ली से आए डॉ. कालीदत्ता दास और एम्स, पटना के डॉ. अविनाश ने दिया। डॉ. कालीदत्ता दास सहित वरिष्ठ डॉक्टरों ने टेबल पर डिमांस्टृेटकर के डॉक्टरों को बारीकी समझाई।
पहले दिन कुल चार वर्कशॉप हुए
बोआकॉन-2025 के पहले दिन कुल चार वर्कशॉप हुए, जिसमें ऑर्थोस्कोपी वर्कशॉप, स्पाइन वर्कशॉप, नी ऑर्थोप्लास्टी वर्कशॉप और टोटल हीप रिप्लेसमेंट वर्कशॉप शामिल रहा। ऑर्थोस्कोपी वर्कशॉप के कंवेनर डॉ. अरविंद प्रसाद गुप्ता और टोटल हीप रिप्लेसमेंट वर्कशॉप के कंवेनर डॉ. अशोक कुमार सिन्हा थे। इस पूरे कार्यक्रम को करने में पारस हॉस्पिटल के डॉ. जानकी शरण भदानी की भूमिका अहम रही है।