रोहिणी आचार्या और तेज प्रताप यादव ने किया पोस्ट।
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रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री पर कसा तंज
अब इसको लेकर रोहिणी आचार्य और तेज प्रताप यादव दोनों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसा है। दोनों ने एक ही पोस्ट को अलग-अलग शेयर किया है। उस पोस्ट में लिखा है कि, "सुशासन बाबू का विकास मॉडल। करोड़ों लोगों के मसीहा लालू प्रसाद यादव का अपमान करना पहली प्राथमिकता। घर से तो निकाल देंगे, बिहार की जनता के दिल से कैसे निकालिएगा। सेहत नहीं तो कम से कम लालू जी के राजनीतिक क़द का ही सम्मान रखते। दरअसल राबड़ी देवी के बाद अब तेजप्रताप को भी आवास खाली कराने का आदेश आया है। तेजप्रताप का आवास 26 एम स्टैंड रोड भाजपा के मंत्री लखेंद्र पासवान को आवंटित किया गया है।
राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने इसे राजनीति से प्रेरित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया
इस संबंध में राजद नेता शक्ति सिंह यादव ने इसे राजनीति से प्रेरित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि, "राबड़ी देवी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री हैं और बिहार विधान परिषद में विपक्ष की वर्तमान नेता भी हैं। ऐसे में यह आश्चर्य की बात है कि किस नियम के तहत उन्होंने आवास बदला है। ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी का इस सरकार में प्रभाव बढ़ गया है। शक्ति सिंह यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता की बागडोर जिनके हाथ में है वे नाममात्र के हैं जबकि मंत्रालय जिनके हाथ में है वे अनुभवी माने जाते हैं। फिर भी इस तरह का फैसला आश्चर्यजनक है।"
इतिहास दोनों हाथों में कालिख लिए नीतीश कुमार का इंतजार कर रहा है
आवास बदलने के आदेश पर लालू परिवार की प्रतिक्रिया जारी है। ऐसे में तेजस्वी यादव के हेंडल से एक पोस्ट किया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तेज हमला किया गया है। यह पोस्ट तेजस्वी की है या नहीं, यह जांच का विषय है, लेकिन जो लिखा है उसे जरुर पढ़ना चाहिए। उस पोस्ट में लिखा है कि, "छोटे भाई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई के बंगले को खाली करने का आदेश दे दिया। लालू जी और उनका परिवार अब 10 सर्कुलर रोड के बंगले में नहीं रहेगा। 28 साल से जिस आवास से बिहार और राजद के लाखों कार्यकर्ताओं का एक भावुक रिश्ता जुड़ा था, उसे एक सरकारी नोटिस में खत्म कर दिया गया है। इस घर के जाने के साथ ही नीतीश जी और लालू जी के बीच के भैयारी वाले नैतिक रिश्ते का भी अंत हो गया है। गिर ही गए, लेकिन इतना नीचे नहीं गिरना था। इतिहास दोनों हाथों में कालिख लिए नीतीश कुमार का इंतजार कर रहा है।"