बिहार के पटना में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की गैरकानूनी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से संबंधित एक मामले में एक और आरोपी के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया है। एजेंसी के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीएफआई के राज्य उपाध्यक्ष मोहम्मद रेयाज मोआरिफ उर्फ बबलू पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है। इससे मामले में आरोप पत्र दायर करने वाले आरोपियों की कुल संख्या 17 हो गई है।
अधिकारी ने बताया कि मामला शुरू में जुलाई 2022 में 26 लोगों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की प्रतिबंधित संगठन की आपराधिक साजिश में अब तक 40 लोग शामिल पाए गए हैं।
एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा कि जांच में पाया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा संगठन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी मोआरिफ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तहत गैरकानूनी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त था।
अधिकारी ने बताया कि आरोपी पीएफआई में शामिल होने के लिए मुस्लिम युवाओं को सक्रिय रूप से कट्टरपंथी बना रहा था। उनके लिए हथियार प्रशिक्षण का आयोजन कर रहा था। साथ ही प्रतिबंधित संगठन के हिंसक एजेंडे और गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए धन भी इकट्ठा कर रहा था।
एजेंसी के मुताबिक, पीएफआई के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर आरोपी मोआरिफ ने आरोपी सनाउल्लाह, अतहर परवेज और जलालुद्दीन खान के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर पीएफआई कैडरों की भर्ती, प्रशिक्षण और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए पटना के फुलवारीशरीफ में अहमद पैलेस में किराए के आवास की व्यवस्था की थी। एनआईए ने कहा कि सह-अभियुक्तों के साथ, मोआरिफ ने बिहार में पीएफआई कैडरों के लिए अहमद पैलेस सहित कई जगह हथियार प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए थे।
प्रवक्ता ने बताया कि एनआईए ने आरोपियों के पास से पीएफआई विजन दस्तावेज 'भारत में इस्लाम के शासन की ओर 2047, आंतरिक दस्तावेज: प्रसार के लिए नहीं' और अन्य आपत्तिजनक लेख जब्त किए हैं। जो भारत में ‘इस्लाम के शासन’ को स्थापित करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संगठन की बड़ी साजिश को उजागर करते हैं।