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Bihar News: डॉक्टर ने लगाया सलाइन और चले गए, परिजन हाथ से पकड़े रहे; पावापुरी मेडिकल कॉलेज की शर्मनाक तस्वीर

Mon, 08 Sep 2025 03:33 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा

सार

Bihar Hindi News Today:  महिला ने बताया कि सलाइन लगाने के बाद डॉक्टर चले गए और कोई देखने नहीं आया। जब स्टैंड की मांग की गई तो अस्पताल कर्मियों ने कह दिया कि स्टैंड उपलब्ध नहीं है, इसलिए बोतल हाथ से पकड़कर रखनी होगी।
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मरीज स्ट्रेचर पर...महिला बनी ‘सलाइन स्टैंड' - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। नालंदा जिले के पावापुरी मेडिकल कॉलेज में मरीज के परिजन को खुद सलाइन की बोतल पकड़कर खड़ा रहना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो न केवल अस्पताल की व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही और मानवीय संवेदना की कमी को भी सामने लाता है।

4 सितंबर की रात की घटना

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मामला 4 सितंबर की रात का है। वायरल वीडियो में एक महिला अपने हाथ से सलाइन की बोतल पकड़े खड़ी दिखाई दे रही है, जबकि मरीज स्ट्रेचर पर लेटा हुआ है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के पूछने पर महिला ने बताया कि सलाइन लगाने के बाद डॉक्टर चले गए और कोई देखने नहीं आया। जब स्टैंड की मांग की गई तो अस्पताल कर्मियों ने कह दिया कि स्टैंड उपलब्ध नहीं है, इसलिए बोतल हाथ से पकड़कर रखनी होगी।

पढ़ें: मुजफ्फरपुर के मुशहरी में डायरिया का प्रकोप, एक महिला की मौत; कई लोग हुए बीमार

सड़क हादसे में घायल हुआ था मरीज

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घटना रहुई थाना क्षेत्र के मोहिद्दीनपुर गांव निवासी अनिल रविदास से जुड़ी है। 4 सितंबर की सुबह करीब 8 बजे मई फरीदा के चमेली बगीचा के पास एक नशे में धुत बाइक सवार ने उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी थी। हादसे में गंभीर रूप से घायल अनिल रविदास को पहले बिहारशरीफ मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां से बेहतर इलाज के लिए उन्हें पावापुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।

जांच के बाद होगी कार्रवाई

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मामले पर पावापुरी मेडिकल कॉलेज के उपाधीक्षक डॉ. अजय कुमार ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जब कॉलेज की प्रिंसिपल सरबिल कुमारी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका सरकारी नंबर बंद मिला। यह रवैया भी अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

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