जनता दल (यू) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मंगलवार को राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने डीएमके के एक मंत्री के बयान को वोट बैंक की राजनीति बताते हुए कहा कि ऐसे बयान राज्य को बांटने की कोशिश हैं। उनके अनुसार डीएमके नेताओं की ओर से लगातार समाज को विभाजित करने वाले बयान दिए जा रहे हैं, जो उनकी बौखलाहट और हताशा का परिणाम हैं।
राजीव रंजन ने कहा कि तमिलनाडु में एआईएडीएमके, भारतीय जनता पार्टी, पीएमके और अन्य दल मिलकर एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में डीएमके की सत्ता में वापसी की संभावना कम होती दिख रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े बयान पर जदयू प्रवक्ता ने इसे गौरवशाली संसदीय परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई पूरी होने तक अध्यक्ष का कुर्सी पर नहीं बैठना परंपरा का हिस्सा है और इसे विवाद का विषय बनाना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
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राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस पुस्तक का आधिकारिक प्रकाशन नहीं हुआ, उसके अंशों के आधार पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने इसी आधार पर उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी। सदन में हुए हंगामे को उन्होंने अपरिपक्वता और सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति का उदाहरण बताया। अजित पवार की विमान दुर्घटना से मौत के मामले में उन्होंने कहा कि हर हादसे की जांच डीजीसीए द्वारा की जाती है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी फिलहाल अटकलें लगाने से बचा जाना चाहिए। मुर्शिदाबाद में मस्जिद निर्माण को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने टीएमसी और संबंधित नेताओं के बीच नूरा कुश्ती का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब ऐसे प्रयासों से प्रभावित नहीं होगी।
बिहार विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष के हंगामे को लेकर उन्होंने कहा कि विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो दशकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास और कानून-व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है तथा अपराध दर में कमी आई है। गृह मंत्रालय द्वारा वंदे मातरम को लेकर जारी निर्देशों पर उन्होंने कहा कि देश इसकी 150वीं वर्षगांठ मना रहा है और यह स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतीक है। वंदे मातरम सुनते ही देशभक्ति और बलिदान की भावना जागृत होती है, इसलिए इसका सम्मान सभी को करना चाहिए।