बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रत्याशियों के विरुद्ध सक्रिय रहे जनता दल यूनाइटेड के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पार्टी सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। अलग-अलग जिलों से गठबंधन-विरोधी गतिविधियों की शिकायतें मिलने के बाद, जनता दल यूनाइटेड के मुख्यालय में इन आवेदनों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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लगातार हो रही रिपोर्टों की समीक्षा
मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यालय स्तर पर प्राप्त चुनावी परिवादों के आधार पर जिला इकाइयों से मंगाई गई रिपोर्टों की लगातार समीक्षा की जा रही है। इन मामलों की समीक्षा के लिए जदयू के प्रदेश कार्यालय में जांच समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के संयोजक और पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, सदस्य एवं मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार और मुख्यालय प्रभारी अनिल कुमार ने प्राप्त नए परिवादों पर विस्तार से क्रमवार विमर्श किया। इस दौरान समिति ने प्रत्येक शिकायत की गहन पड़ताल की। इस पड़ताल के दौरान क्षेत्रीय स्रोतों से प्राप्त रिपोर्टों का सत्यापन किया गया। उपलब्ध तथ्यों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया गया।
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नेताओं पर लटकने वाली है कार्रवाई की तलवार
समिति ने सभी मामलों की गंभीरता को देखते हुए, आगे की कार्रवाई के संबंध में आवश्यक सुझाव भी प्रदान किए हैं। माना जा रहा है कि इन सुझावों पर जल्द ही पार्टी आलाकमान कोई बड़ा फैसला ले सकता है। एनडीए उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाने वाले नेताओं पर अब कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी जदयू ने की थी कार्रवाई
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भी जनता दल यूनाइटेड ने एक्शन लिया था, जिसमें नीतीश कुमार ने अपने 11 नेताओं भोजपुर-बड़हरा के पूर्व एमएलसी रणविजय सिंह, बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल निवासी अमर कुमार सिंह, वैशाली की डॉ. आसमा परवीन, पूर्वी चंपारण के दिव्यांशु भारद्धाज, शेखपुरा-बरबीघा के पूर्व विधायक सुदर्शन कुमार, मुंगेर-जमालपुर के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, औरंगाबाद के लव कुमार, सिवान के विवेक शुक्ला, जमुई-चकाई के पूर्व सदस्य विधान परिषद संजय प्रसाद, सीवान-बड़हरिया के पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह और कटिहार निवासी आशा सुमन को न सिर्फ तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। इनपर पार्टी की विचारधारा के खिलाफ जाकर बागी बनने का आरोप था।