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Bihar News: वैशाली में ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ का शुभारंभ, सीएम नीतीश ने यह बातें कहीं

Tue, 29 Jul 2025 04:09 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली

सार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ न केवल वैशाली को वैश्विक बौद्ध मानचित्र पर प्रतिष्ठित करेगा बल्कि पर्यटन, संस्कृति और रोजगार को भी नई दिशा देगा।
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‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ का उद्घाटन हुआ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ शुभारंभ कर दिया। मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बिहार सरकार के कई मंत्री भी उद्घाटन कार्यक्रम शामिल हुए। स्मारक वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना। कार्यक्रम में चीन, जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, नेपाल, तिब्बत, म्यांमार, भूटान, वियतनाम, मलेशिया, लाओस, कंबोडिया, मंगोलिया, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे 15 बौद्ध देशों के भिक्षुओं की सहभागिता रही है। यह स्तूप का निर्माण भवन निर्माण विभाग कि ओर से किया गया है। 

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मुख्यमंत्री ने कहां है कि यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ का मंगलवार को लोकार्पण हो गया है। इस लोकार्पण समारोह में दुनिया भर के करीब 15 देशों के बौद्ध धर्मावलंबी और बौद्ध भिक्षु आकर शामिल हुए यह हम सभी बिहारवासियों के लिए गौरव का क्षण है। मैंने बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप के निर्माण कार्य का लगातार निरीक्षण किया ताकि निर्माण कार्य विशिष्ट ढंग से जल्द से जल्द पूर्ण हो सके। इस परिसर का स्वरूप पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी काफी अच्छा बनाया गया है ताकि यहां आने वाले पर्यटकों को सुखद अनुभूति हो।

चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपनी पुस्तक में किया था जिक्र
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय सह स्मृति स्तूप’ के प्रथम तल पर भगवान बुद्ध का पावन अस्थि कलश स्थापित किया गया है जो स्मारक का प्रमुख केंद्र बिंदु है। भगवान बुद्ध का अस्थि अवशेष 6 जगहों से प्राप्त हुआ जिसमें वैशाली के मड स्तूप से जो अस्थि अवशेष मिले वह सबसे प्रामाणिक है जिसका जिक्र चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी पुस्तक में किया है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि वैशाली ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि है, जिसने दुनिया को पहला गणतंत्र दिया। यह नारी सशक्तीकरण की भी भूमि रही है। बौद्ध धर्मावलंबियों के संघ में पहली बार यहां महिलाओं को शामिल किया गया। यह स्तूप बिहार की सांस्कृतिक धरोहर और वैश्विक बौद्ध विरासत का भव्य प्रतीक है।
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केवल पत्थरों से इस स्तूप का निर्माण किया गया है
इस स्तूप को 550 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से 72 एकड़ भूमि में पुष्करणी तालाब और मिट्टी के स्तूप के नजदीक विकसित किया गया है। इसके पहले तल पर भगवान बुद्ध का अस्थि कलश स्थापित किया गया है, जो वर्ष 1958 से 62 के बीच हुई खुदाई के दौरान मिला था। आधुनिक भारत के इतिहास में पहली बार बिहार के वैशाली जिले में केवल पत्थरों से इस स्तूप का निर्माण किया गया है। सीमेंट, ईंट या कंक्रीट जैसी सामग्री के बिना ही इसका निर्माण किया गया है। स्तूप की कुल ऊंचाई 33.10 मीटर, आंतरिक व्यास 37.80 मीटर तथा बाहरी व्यास 49.80 मीटर है।  इसकी ऊंचाई विश्व प्रख्यात सांची स्तूप से लगभग दोगुनी है। इसमें राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से मंगवाए गए 42,373 बलुआ पत्थर टंग वं ग्रुव तकनीक से जोड़े गए हैं, पत्थरों को लगाने के लिए सीमेंट या किसी चिपकाने वाला पदार्थ या अन्य चीजों का प्रयोग नहीं किया गया है। प्रवेश के लिए बना सांची से भव्य तोरण द्वार, बौद्ध वास्तुकला की पराकाष्ठा को दर्शाता है जबकि 32 रोशनदान, स्तूप में निरंतर प्रकाश व हवा का प्रवाह बनाए रखते हैं। परिसर में घ्यान केंद्र, पुस्तकालय, आगंतुक केंद्र, संग्रहालय ब्लॉक, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया,  500 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र, पार्किंग और अन्य सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। 

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