Bihar : राजधानी पटना में कचरा निस्तारण का एक ऐसा केंद्र आकार ले रहा है, जिसकी जद में अब सिर्फ आम आदमी ही नहीं, बल्कि शहर के रसूखदार और वीआईपी भी होंगे। आने वाले दिनों में शहर की पॉश कॉलोनियों और सरकारी दफ्तरों की हवा बिगाड़ने के लिए तैयार हो रहा है।
पटना शहर में एक बड़ा कचरा निस्तारण केंद्र बन रहा है। अब तक सिर्फ आम आदमी को परेशान करने वाली जगह पर कचरा निस्तारण केंद्र बनता रहा है। लेकिन, इस बार वीआईपी भी इसके दायरे में होंगे। मतलब, दुर्गंध उन्हें भी मिलेगी।
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दुर्गंध से अछूता नहीं रहेगा सचिवालय और विधानसभा
सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट अटल पथ होकर मुख्यमंत्री आवास जाने के लिए जिस रास्ते का उपयोग किया जाता रहा है, उसी से सटे बन रहा यारपुर कचरा निस्तारण केंद्र। यह पटना की छवि किस तरह खराब करेगा, यह समझना मुश्किल नहीं। अटल पथ से सचिवालय थाना आते ही दुर्गंध से सामना होगा। हार्डिंग रोड पर विधानसभा तक पहुंचते-पहुंचते सांस लेना मुश्किल होगा। जिस तरह गर्दनीबाग के कचरा निस्तारण केंद्र की दुर्गंध सिर्फ गर्दनीबाग सरकारी अस्पताल तक नहीं पहुंचकर वित्त भवन सहित आवासीय क्षेत्र में करीब एक किलोमीटर के दायरे तक परेशान करती है, उसी तरह हवा के झोंके पर यारपुर में प्रस्तावित कचरा निस्तारण केंद्र की दुर्गंध होटल चाणक्य में पहुंचने वाले वीआईपी को भी मिलेगी और टेलीफोन भवन और सोन भवन में काम करने वाले हजारों कर्मियों और सैकड़ों अधिकारियों को भी।
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इन दफ्तरों और ठिकानों पर पड़ेगा सीधा असर
गर्दनीबाग के मौजूदा कचरा केंद्र का अनुभव बताता है कि इसकी दुर्गंध लगभग एक से दो किलोमीटर के दायरे तक फैलती है। यारपुर केंद्र बनने के बाद बिहार विधान मंडल, आर ब्लॉक, होटल चाणक्य, सोन और टेलीफोन भवन के साथ-साथ कचड़ा निस्तारण केंद्र के बाद पड़ने वाले पूर्व विधायक आवास और वर्तमान पुलिस भवन निर्माण निगम और आयोग के दफ्तरों में भी सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। इस तरफ दीवार से सटे विधायक के अलावे अन्य अधिकारियों के आवास हैं, अब उनकी भी परेशानियां बढ़ेंगी।
यह कैसा मास्टरप्लान का हिस्सा?
गर्दनीबाग के यारपुर में बन रहे कचरा निस्तारण केंद्र के संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री आवास जाने वाले रास्ते और महत्वपूर्ण आयोगों के दफ्तरों के बीच बन रहा यह केंद्र पटना की छवि पर भी सवालिया निशान खड़ा कर सकता है।लोगों का कहना है कि विकास के दावों के बीच, कचरा प्रबंधन के लिए ऐसी जगह का चयन विशेषज्ञों की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। क्या शहर की छवि को दुर्गंध के हवाले करना ही मास्टरप्लान का हिस्सा है?