सुशील मोदी के जयंती समारोह पर आयोजित कार्यक्रम में सीएम नीतीश के साथ भाजपा और जदयू के वरिष्ठ नेता।
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लालू को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाई
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा बताते हैं कि सुशील मोदी उन नेताओं में थे, जिन्होंने चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव की भूमिका को उजागर किया था। इस मामले में उन्होंने ही पटना हाईकोर्ट में लालू प्रसाद के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। उस वक्त भाजपा के कई वरिष्ठ नेता इस मामले को लेकर बहुत ज्यादा गंभीर नहीं थे। लेकिन सुशील मोदी ने इसे उठाया और देश स्तर तक पहुंचा दिया। 2005 में लालू-राबड़ी सरकार गिरने में इस घोटाले ने अहम भूमिका निभाई। 2005 में बिहार में नीतीश कुमार के जद-यू और भाजपा की गठजोड़ सरकार बनने पर मोदी पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। 2013 में जब प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को भाजपा ने आगे किया था, तब नीतीश कुमार ने भाजपा से दूरी बना ली। येन-केन-प्रकारेण यह दूरी बनी तो 2014 के लोकसभा के बाद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी कायम रही। भाजपा को इस चुनाव में भारी झटका लगा। कोई तारणहार नहीं नजर आ रहा था। नीतीश कुमार वापस लालू प्रसाद यादव के साथ हो लिए थे। पहली बार तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम की कुर्सी मिली थी। सब ठीक ही चल रहा था। लेकिन, फिर सुशील कुमार मोदी ने मिट्टी-मॉल घोटाले की फाइल ऐसी खोली कि नीतीश कुमार को अपने फैसले पर शक होने लगा। लगभग 50 दिनों तक सुशील मोदी ने ऐसा अभियान चलाया कि नीतीश कुमार का शक यकीन में बदल गया और 2015 में लिए महागठबंधन के लिए जनादेश को ठुकरा कर वह 2017 में वापस भाजपा के साथ आ गए। वर्ष 2020 में जब बिहार में फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते थे कि सुशील मोदी ही डिप्टी सीएम बनें। लेकिन, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। कैंसर की घोषणा करते समय तक राज्यसभा सांसद ही थे। लेकिन, कैंसर से जंग वह जीत नहीं पाएं। 13 मई 2024 को उन्होंने दिल्ली एम्स में अंतिम सांस ली।
'आज भी बिहार की प्रगति की नींव बने हुए हैं'
डिप्टी चौधरी ने कहा कि सुशील मोदी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष, सुशासन और विकास को प्राथमिकता दी। उपमुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने वित्तीय अनुशासन, सामाजिक न्याय और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जो कार्य किए, वे आज भी बिहार की प्रगति की नींव बने हुए हैं। बतौर उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जहां बिहार के विकास के लिए अभूतपूर्व काम किया वहीं विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने मजबूत भूमिका निभाई। सुशील मोदी जब सदन में आते थे तब तत्कालीन सरकार दहशत में रहती थी कि वो कौन सी नई फाइल लेकर आएंगे। विपक्ष में रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर करने का काम किया।
पीएम मोदी ने कहा था- भाजपा के उत्थान के पीछे उनका अमूल्य योगदान
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बिहार में भाजपा के उत्थान और उसकी सफलताओं के पीछे उनका (सुशील मोदी) अमूल्य योगदान रहा। आपातकाल का पुरजोर विरोध करते हुए, उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे बेहद मेहनती और मिलनसार विधायक के रूप में जाने जाते थे। राजनीति से जुड़े विषयों को लेकर उनकी समझ बहुत गहरी थी। उन्होंने एक प्रशासक के तौर पर भी काफी सराहनीय कार्य किए। जीएसटी पारित होने में उनकी सक्रिय भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी।