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Bihar : जेल जाने से बचने के लिए लड़ा था चुनाव, EOU ने शिक्षक भर्ती पेपर लीक के इस मोस्ट वांटेड को दबोचा

Tue, 09 Dec 2025 10:45 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना / शेखपुरा

सार

Bihar : प्रश्नपत्र लीक मामला से बचने के लिए राजनीति में एंट्री करने की कोशिश की। कांग्रेस के साथ रहने के बाद भी जब वहां से टिकट नहीं मिला, तब निर्दलीय चुनाव लड़ गए। अब बीपीएससी TRE 3.0 प्रश्न पत्र लीक मामले में ईओयू की विशेष टीम ने गिरफ्तार किया है।
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संजय कुमार प्रभात। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं को कदाचार मुक्त बनाने की दिशा में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई को एक बड़ी सफलता मिली है। आगामी महत्वपूर्ण परीक्षाओं से ठीक पहले ईओयू की विशेष टीम ने कुख्यात परीक्षा माफिया संजय कुमार प्रभात को गिरफ्तार किया है। संजय कुमार प्रभात मुख्य रूप से 15 मार्च 2024 को आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में वांछित था। पुलिस ने उसके खिलाफ कांड सं0-06/2024 के तहत मामला दर्ज किया था। ईओयू की विशेष टीम ने ने अब उसे पटना के गोला रोड इलाके से गिरफ्तार किया है। 

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आरोपी का पुराना रहा है आपराधिक इतिहास
इस संबंध में पुलिस का कहना है कि आरोपी ने बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक कराकर भारी मात्रा में धन अर्जितकिया। वह अभ्यर्थियों को लीक प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के लिए बिचौलिए के तौर पर काम करता था और प्रत्येक अभ्यर्थी से कमीशन के रूप में लगभग एक लाख रुपये की वसूली करता था। आरोपी का आपराधिक इतिहास काफी पुराना और अंतरराज्यीय स्तर का है। वह वर्ष 2016 में तेलंगाना स्टेट इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर एवं मेडिकल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के पेपर लीक कांड में भी अभियुक्त था। 2016 में उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट पेपर लीक मामले में भी उसका नाम सामने आया था।
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आगामी परीक्षाओं पर भी थी नजर 
ईओयू को यह भी जानकारी मिली थी कि संजय कुमार प्रभात 10 दिसंबर 2025 को होने वाली चालक सिपाही भर्ती परीक्षा और 14 दिसंबर 2025 को होने वाली प्रवर्तन अवर निरीक्षक परीक्षा सहित अन्य आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी 'सेटिंग' करने की फिराक में था। वह कई अभ्यर्थियों से एडमिट कार्ड जमा कराकर उन्हें पास कराने का आश्वासन दे रहा था। फिलहाल, पुलिस आरोपी के पैसे के लेन-देन और उसके संपर्कों की गहनता से जांच कर रही है। गौरतलब है कि BPSC TRE 3.0 पेपर लीक कांड में EOU द्वारा अब तक कुल 289 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है और गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।
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अवैध कमाई को छिपाने के लिए कुख्यात की थी राजनीति में एंट्री
संजय कुमार प्रभात शेखपुरा जिले के शेखोपुर सराय का रहने वाला है। वह कुख्यात 'संजीव मुखिया गिरोह' का एक सक्रिय सदस्य है। वह बीपीएससी TRE 3.0 पेपर लीक मामले में भी में वांछित था।  
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वर्ष 2016 से देश के अलग-अलग हिस्सों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक में शामिल रहा कुख्यात संजय प्रभात अपने काली कमाई को छिपाने के लिए राजनीति को सेफ जोन मानते हुए राजनीति में कदम रखा। लंबे वक्त तक कांग्रेस पार्टी में जुड़े रहने के बाद जब वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो संजय ने चुनावी मैदान में बरबीघा विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उसने खूब पैसा उड़ाया , लेकिन लोगों का विश्वास जीतने में असफल रहने पर उसे हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में उसे महज 1446 वोट ही मिले जो नोटा के मिले वोट के एक चौथाई के बराबर है।
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लालू के समय में थे सरकारी शिक्षक 
संजय प्रभात की परिवारिक पृष्ठभूमि सामान्य सी थी। संजय के पिता पेशे से सरकारी शिक्षक थे। संजय प्रभात भी लालू यादव के दौर में सरकारी शिक्षक हुआ करते थे, लेकिन राजनीतिक मोह में संजय ने वर्ष 2005 में शिक्षक के पद से त्यागपत्र देकर नवादा जिले के गोविंदपुर विधानसभा से राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े। उस चुनाव में उनको लगभग पंद्रह हजार वोट ही मिले, नतीजतन संजय कुमार प्रभात चुनाव हार गए। फिर वह संजीव मुखिया गिऱोह के संपर्क में आ गए और फिर देखते ही देखते अकूत संपत्ति के मालिक हो गए।

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