मुख्यमंत्री ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के लाभार्थियों को ब्याजमुक्त राहत देकर सराहनीय कदम उठाया है। इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। लेकिन इसी योजना को जमीन पर उतारने वाले जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) के कर्मी अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि पिछले 9 वर्षों से सेवा देने के बावजूद आज भी वे असुरक्षा और अल्प वेतन की मार झेल रहे हैं।
डीआरसीसी कर्मी संघ के उपाध्यक्ष अब्दुल्ला और मीडिया प्रभारी संजय विद्यार्थी ने बताया कि वे वर्ष 2016 से मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना के तहत कार्यरत हैं। लेकिन अब तक न तो उनका वेतन पुनरीक्षण हुआ और न ही सेवा स्थायी की गई। कर्मी अंजली सिन्हा ने कहा कि हम लोग बहुत कम वेतन पर काम कर रहे हैं। कई कर्मचारी 300 से 500 किलोमीटर दूर से आकर सेवा दे रहे हैं। इतनी कम आय में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है।
पढ़ें: भागलपुर में बाढ़ राहत राशि में बड़े पैमाने पर घोटाला, अपात्र लोगों के खाते में पहुंचे सात-सात हजार
कर्मियों का कहना है कि जब राज्य सरकार अन्य विभागों के कर्मचारियों का वेतन संशोधित कर रही है तो उनके साथ भेदभाव क्यों हो रहा है। उन्हें भी सम्मानजनक वेतन दिया जाना चाहिए। साथ ही हर 11 महीने पर अनुबंध नवीनीकरण की प्रक्रिया मानसिक दबाव का कारण बनती है। कर्मी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि जिस तरह टोला सेवकों की सेवा 60 वर्ष तक स्थायी की गई है, उसी तर्ज पर उनकी भी सेवा नियमित की जानी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, पूरे बिहार में करीब 750 डीआरसीसी कर्मी कार्यरत हैं। 9 वर्षों से वे अपनी सेवा शर्तों में सुधार और भविष्य सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि अब वे उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां दूसरी नौकरी तलाशना संभव नहीं है। इसलिए मुख्यमंत्री से उनकी गुहार है कि उनकी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर समाधान किया जाए।