बिहार में वायु प्रदूषण की समस्या केवल पराली जलाने तक सीमित नहीं है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के थर्मल पावर प्लांट पराली जलाने से 10 गुना अधिक सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जित करते हैं। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि किसी भी पावर प्लांट में फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम नहीं लगा है, जो इस प्रदूषण को नियंत्रित करने में कारगर साबित हो सकता है।
FGD लागू करने के बाद थर्मल पावर प्लांट के अनुसार संभावित SO₂ उत्सर्जन में कमी
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव
सल्फर डाइऑक्साइड, वायुमंडल में सल्फेट कणों में परिवर्तित होकर पीएम 2.5 का मुख्य घटक बनता है, जो वायु गुणवत्ता को खराब करता है और स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। आईआईटी दिल्ली के अध्ययन के अनुसार, एफजीडी सिस्टम से 60-80 किमी के दायरे में सल्फर डाइऑक्साइड का स्तर 55 प्रतिशत और सल्फेट कणों का स्तर 30 प्रतिशत तक घटाया जा सकता है।
भारत: विश्व का सबसे बड़ा सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जक
2023 में भारत ने 6,807 किलोटन सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन किया, जो तुर्की और इंडोनेशिया जैसे देशों से तीन गुना अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा कोयला आधारित बिजली उत्पादन से आता है।
सीआरईए रिपोर्ट में 2015 के पर्यावरण मंत्रालय के मानकों का पालन न करने पर सवाल उठाया गया है। बार-बार राहत दिए जाने के कारण थर्मल पावर प्लांट्स एफजीडी सिस्टम लगाने में देरी कर रहे हैं। वहीं, किसानों पर पराली जलाने के लिए सख्त कार्रवाई की जाती है।