बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि मुंगेर जिले में आयोजित होने वाला 'सीताकुंड मेला' अब बिहार राज्य मेला अधिनियम, 2008 की धारा-3(5) के अंतर्गत बिहार मेला प्राधिकार के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। इस संबंध में अधिसूचना का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय सीताकुंड मेले की पौराणिक, धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन संबंधी महत्ता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
मेला प्राधिकार के अधीन आने से मेले का विस्तार और आकर्षण बढ़ेगा, साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि मुंगेर सदर अंचल क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक 'सीताकुंड' गंगा नदी के किनारे, जिला मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहीं माता सीता ने अग्नि परीक्षा दी थी। यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आस्था का केंद्र है।
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हजारों श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक करते हैं दर्शन
सम्राट चौधरी ने बताया कि सीताकुंड मेला प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा से प्रारंभ होकर फाल्गुन पूर्णिमा तक आयोजित होता है। यह मेला करीब एक महीने तक चलता है, जिसमें मुंगेर के अलावा भागलपुर, खगड़िया, बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया, लखीसराय सहित आसपास के जिलों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इतना ही नहीं, पूरे वर्ष भर में लगभग 5000 विदेशी पर्यटक भी सीताकुंड मंदिर में दर्शन व पूजन के लिए आते हैं, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनी है।
धार्मिक मान्यता और विशेषताएं
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि सीताकुंड परिसर में माता सीता, भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नाम पर पांच कुण्ड स्थित हैं। मान्यता है कि माता सीता की अग्नि परीक्षा के उपरांत उनके नाम वाला कुण्ड गरम जल छोड़ता है, जबकि शेष चार कुण्डों से ठंडा जल प्रवाहित होता है। इन विशेषताओं के कारण यह स्थान आस्था के साथ-साथ रहस्यमय आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।
व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है बल
मेले के दौरान बड़ी संख्या में फर्नीचर व अन्य वस्तुओं की दुकानें लगती हैं। गंगा तट के समीप होने के कारण कुछ श्रद्धालु जलमार्ग से भी यहाँ पहुंचते हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के पारंपरिक मेलों से स्थानीय व्यापार और कारीगरों को आर्थिक संबल मिलता है। सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक मेलों को संरक्षित व प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीताकुंड मेले को मेला प्राधिकार के अधीन लाकर इसके समुचित विकास, प्रचार-प्रसार और प्रबंधन को सुनिश्चित किया जाएगा।