मुख्यमंत्री के निर्देश के आलोक में गठित अग्नि सुरक्षा कार्ययोजना क्रियान्वयन निगरानी समिति की मंगलवार को यहां पटेल भवन में आयोजित बैठक में उक्त फैसले किए गए। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्राधिकरण के माननीय सदस्य श्री पारस नाथ राय, प्राधिकरण के सदस्य नरेंद्र कुमार सिंह, महानिदेशक (अग्निशमन सेवाएं) शोभा अहोतकर, विशेष सचिव (गृह) के. सुहिता अनुपम, पुलिस महानिरीक्षक (अग्निशमन सेवाएं) एम. सुनील कुमार नायक, उपमहानिरीक्षक (अग्निशमन सेवाएं) एम. के. चैधरी और संयुक्त सचिव (भवन निर्माण) संजय कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में डॉ. उदय कांत ने कहा कि अग्नि सुरक्षा के लिए हमें अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक तीन तरह की योजनाएं बनानी होंगी। वैसे तो आग लगने के बाद सभी हाथ-पैर मारते हैं, लेकिन आग लगे ही नहीं इसे लेकर अब तक विशेष विमर्श नहीं हुआ है। नजरिया बदलना होगा। हमें फायर फाइटिंग की बजाय फायर इंजीनियरिंग पर फोकस करना होगा। आग लगने की घटना का पूर्वानुमान लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा मशीन लर्निंग (एमएल) एवं आग पर काबू पाने के लिए रोबोट और ड्रोन जैसी नई तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना होगा। इसी कड़ी में उन्होंने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आईआईटी, पटना के सहयोग से तैयार किए जा रहे ‘नीतीश‘ पेंडेंट की खास तौर पर चर्चा की। गौरतलब है कि इस पेंडेंट के जरिये आधुनिक तकनीक की मदद से विभिन्न आपदाओं की पूर्व सूचना लोगों को दी जा सकेगी।
एक सर्वे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अगलगी की तकरीबन 50 फीसद घटनाएं बिजली के कारण होती हैं। ऊर्जा विभाग को अल्यूमीनियम वायर का इस्तेमाल रोकना होगा। ड्राई ट्रांसफार्मर लगाने होंगे। बड़े अपार्टमेंट, मल्टीप्लेक्स की लोड एनालिसिस सही तरीके से करनी होगी। शहर तेजी से हीट आईलैंड में तब्दील हो रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से परिस्थितियां दुष्कर होती जा रही हैं। अगलगी की घटनाएं पहले से काफी बढ़ी हैं। इसी अनुरूप हम सभी को तैयार रहना होगा। पेड़-पौधों तथा वाटर बाॅडीज की रक्षा करनी होगी। उन्हें बढ़ाना होगा। अकीरा मियावाकी पद्धति से नए वन लगाने होंगे। डॉ उदय कांत ने नेशनल बिल्डिंग कोड और बिहार बिल्डिंग बायलॉज की चर्चा करते हुए कहा कि इनमें अग्नि सुरक्षा को लेकर विस्तृत प्रावधान रखे गए हैं। भवन निर्माण विभाग को इसे कड़ाई से लागू करना होगा।
पारसनाथ राय ने इस अवसर पर कहा कि नवनिर्मित किसी भी भवन को आग से जब तक पूरी तरह सुरक्षित घोषित न कर दिया जाए, स्थानीय निकाय ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट उस भवन को जारी न करे। नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि ऊंची इमारतों में फायरमैन्स लिफ्ट और इवैक्युएशन लिफ्ट की अलग से व्यवस्था करनी होगी। भवन निर्माण विभाग पहले सरकारी भवनों में इन्हें बनवाना शुरू करे। फिर अपार्टमेंट्स और निजी भवनों में भी यह व्यवस्था सुनिश्चित करे। बैठक में कई विभागों के वरीय पदाधिकारियों की अनुपस्थिति पर उपाध्यक्ष ने गहरा असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि वरीय अधिकारी इस बैठक की गंभीरता को समझें। इसमें अपने प्रतिनिधि कतई न भेजें।
महानिदेशक (अग्निशमन सेवाएं) शोभा अहोतकर ने समिति के कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के दिशानिर्देश पर यह समिति वर्ष-2017 में गठित की गई थी। वर्ष-2023 में इसका पुनर्गठन किया गया। सात विभागों के अपर मुख्य सचिव इसमें शामिल रखे गए हैं। अग्नि सुरक्षा योजना और उसके क्रियान्वयन पर यह समिति निगरानी रखती है। उन्होंने बताया कि विश्व के समक्ष जलवायु परिवर्तन आज सबसे बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है। इससे अगलगी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। रोजाना हमें नई-नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बिहार में अग्निशमन सेवा की तैयारियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कई नए अत्याधुनिक उपकरण खरीदे गए हैं। बड़ा हाइड्रोलिक वाहन खरीदा गया है। भर्तियां की जा रही हैं। इसे हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल में ही सारे होटल और कोचिंग सेंटर की फायर ऑडिट विभाग ने कराई है। अस्पतालों की ऑडिट हम हर माह कराते हैं।