बिहार में बाढ़ का कहर जारी है। गंडक, कोसी, पुनपुन, दरधा, सोन बागमती और गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने से पटना, भोजपुर, बक्सर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका, सहरसा, सुपौल के निचले इलाकों में बाढ़ आ गया है। घर, खेत, खलिहान सबकुछ जलमग्न हो चुका है। जल संसाधन विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि 13 जिलों के 74 प्रखंडों की 423 ग्राम पंचायतों में करीब 27.01 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल शामिल हैं। करीब 70 से अधिक प्रखंडों के 20 लाख से अधिक लोग इस बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। बाढ़ के पानी में डूबने से 20 से अधिक लोगों की जान गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। आज वह सोनपुर पहुंचे हैं। उन्होंने अधिकारियों को चौबीसों घंटे निगरानी करने, राहत और बचाव कार्य चलाने समेत कई तरह के दिशा निर्देश दिए हैं।
पटना में गंगा, पुनपुन के कारण स्थिति भयावह
पटना के पालीगंज का हाल।
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पटना में गंगा के साथ-साथ पुनपुन, दरधा और महत्माईन नदी उफान पर है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रिकॉर्ड 50.57 मीटर पर पहुंच गया। 2016 के बाद पहली बार ऐसी स्थिति हुई है। 2016 में गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.52 मीटर रिकॉर्ड किया गया था। दीघा घाट, एलसीटी घाट, कलेक्ट्रेट घाट, गांधी घाट, रानीघाट, महावीर घाट समेत सभी घाटों पर गंगा लबालब है। दीघा घाट पर मुक्तिधाम डूबने के कारण लोगों को सड़क किनारे दाह संस्कार करना पड़ रहा है। बांस घाट और गुलबी घाट पर यही स्थिति है। इधर, कंगनघाट पर एप्रोच रोड पर पानी घुस गया है। कंगनघाट के पास वाले गुरुद्वारा के इलाके में घुटने भर पानी है। पटना सिटी के 10 से अधिक मोहल्लों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों का हाल बेहाल है। वहीं पटना के दानापुर, पालीगंज, मनेर, मोकामा के कई पंचायत भी बाढ़ की चपेट में हैं। पुनपुन नदी किनारे के 17 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पुनपुन नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। पुनपुन इलाके की स्थिति भयावह हो गई है।
जल संसाधन विभाग ने क्या कहा?
बिंद टोली इलाके में घुसा गंगा का पानी।
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जल संसाधन विभाग के अनुसार, पटना के गांधीघाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 6 सितंबर को उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर से छह सेंटीमीटर ऊपर 50.58 मीटर तक पहुंचने के बाद अब लगातार घट रहा है और सात सितंबर सुबह 10 बजे 50.40 मीटर दर्ज किया गया। जल संसाधन विभाग की ओर जारी बाढ़ पूर्वानुमान के मुताबिक गांधीघाट पर जलस्तर में गिरावट का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है। वहीं, पटना के हाथीदह गेज स्थल पर भी जलस्तर छह सितंबर को HFL 43.52 मीटर तक पहुंचने के बाद घटकर सात सितंबर सुबह 10 बजे 43.50 मीटर रह गया। हालांकि, इसका असर डाउनस्ट्रीम में भागलपुर के सुल्तानगंज गेज स्थल पर दिखाई दे रहा है, जहां सात सितंबर सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 36.72 मीटर दर्ज हुआ, जो HFL 36.75 मीटर से महज तीन सेंटीमीटर नीचे है। सात सितंबर रात 12 बजे से सुबह 10 बजे तक यहां जलस्तर करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ा है, ऐसे में सुल्तानगंज में गंगा के HFL तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के लिए वैशाली और सारण पहुंचे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री लाभुक को चेक सौंपते हुए
बिहार में बाढ़ के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण जिलों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। दौरे की शुरुआत हाजीपुर से हुई, जहां उन्होंने पुराने टोल प्लाजा के पास संचालित राहत शिविर का औचक निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने सामुदायिक किचन में तैयार हो रहे भोजन की गुणवत्ता और शिविर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। इसके बाद आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर बच्चों से बातचीत की। उन्होंने बाढ़ के दौरान डूबने से जान गंवाने वाले करीब आधा दर्जन लोगों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये के अनुग्रह मुआवजे के चेक सौंपे और अन्य प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री वितरित की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए और बाढ़ प्रभावित लोगों तक जरूरी सुविधाएं समय पर पहुंचाई जाएं।
सारण में बाढ़ की स्थिति भयावह, जानिए हाल
सारण में कटाव रोकने के लिए काम में जुटे लोग।
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बिहार के सारण जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पिछले 48 से 60 घंटों में करीब पांच से अधिक बांध टूट चुके हैं, जबकि लगभग 20 स्थानों पर रिसाव जारी है। दरियापुर में महीं नदी का तटबंध करीब 10 मीटर टूटने से मुजोना, खानपुर, अकबरपुर, बेला और विश्वंभरपुर समेत करीब 50 गांवों में पानी फैलने का खतरा बढ़ गया है। वहीं मांझी में दाहा नदी का बांध टूटने से इमादपुर बिंटोलिया के सैकड़ों घरों में पानी घुस गया है और करीब 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई। जिले के सात प्रखंडों की 35 पंचायतों के 109 गांवों की 2,33,511 आबादी प्रभावित है। प्रशासन ने 1,20,060 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। राहत के लिए 155 नाव, छह बोट एंबुलेंस, एनडीआरएफ की एक और एसडीआरएफ की छह टीमें तैनात हैं। 15 सामुदायिक रसोई के जरिए 12 हजार से अधिक लोगों को भोजन कराया जा रहा है।
बेगूसराय के 25 पंचायतों में घुसा बाढ़ का पानी
बेगूसराय के गांव का हाल।
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बेगूसराय में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। जिले के पांच प्रखंडों की 25 पंचायतों और नगर निगम के चार वार्डों में पानी फैल गया है। नगर निगम के वार्ड 18 स्थित सीहमा गांव में घरों में कमर तक पानी पहुंच गया है, जिसके कारण कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं। वहीं सड़क पर भी घुटने भर पानी जमा है। लोग तिरपाल लगाकर, ईंटों पर चौकी रखकर उसी पर गैस चूल्हा और बर्तन रखकर खाना बनाने को मजबूर हैं। जिले में दो लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। लोगों के सामने खाने-पीने के सामान, शौचालय और आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। नाव ही कई इलाकों में आने-जाने का एकमात्र सहारा बनी हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में नावों की व्यवस्था की गई है और तिरपाल का वितरण जारी है। कई स्थानों पर सामुदायिक रसोई भी शुरू की गई हैं, लेकिन पानी के बीच लोगों का जीवन बेहद मुश्किल बना हुआ है।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी बाढ़ का कहर
बाढ़ से लोग परेशान।
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के गृह जिले मुंगेर में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। जिले की 37 पंचायतों के करीब 300 गांवों की 3.05 लाख आबादी प्रभावित है। राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा के लिए केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने रविवार को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों और नेपाल में बारिश के कारण गंगा, कोसी व गंडक का जलस्तर बढ़ रहा है। बाढ़ प्रभावितों के लिए 27 सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं और विस्थापित लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है। मंत्री ने भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा चावल, दाल और हरी सब्जियों का पौष्टिक व सुपाच्य भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं, बोट एंबुलेंस के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में दवाएं पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बिहार के साथ है और क्षति के आकलन के आधार पर राज्य को हरसंभव सहायता दी जाएगी।
226 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अलग-अलग जिलों में 226 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 3.75 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चार राहत शिविर भी चलाए जा रहे हैं। इन शिविरों में रह रहे करीब 2,505 बाढ़ पीड़ितों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा समेत जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी रखते हुए लोगों तक भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।