बड़े-बड़े अस्पतालों के काउंटर पर महाठग बैठे हुए हैं, जो न सिर्फ उस अस्पताल को लूट रहे हैं बल्कि आपके रुपये भी डकार रहे हैं। अब इसकी जांच शुरू हो गई है। यह मामला पहले एम्स और अब मिशनरी अस्पताल कुर्जी में सामने आया, जिसकी जांच चल रही है। आइये अस्पताल के काउंटर पर बैठे महाठग कैसे करते हैं ठगी, यह समझें।
चीफ कैशियर अनुराग अमन ने बताई वजह
कुर्जी होली फैमिली अस्पताल में भी मामला हुआ उजागर
एम्स के मामले के बाद कुर्जी होली फैमिली अस्पताल में भी जांच शुरू हुई। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि एम्स की तरह ही यहां भी 2.91 लाख रुपए का गबन किया गया है। यह आरोप कुर्जी होली फैमिली अस्पताल के अधीन चलने वाले कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रशिक्षण लिपिक नीरज कुमार पर लगा। सैदपुर का रहने वाला है। मामला उजागर होने के बाद अस्पताल की प्रशासक प्रिंसी मैथ्यु के लिखित बयान पर पाटलिपुत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि मामला सामने आने के बाद से नीरज कुमार फरार है।
खुद के अकाउंट पर कराता था ट्रांजेक्शन
नीरज कुमार का काम बिहार विश्वविद्यालय के छात्रों से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुल्क लेना और उनका रिकॉर्ड मेंटेन करना था। सितंबर 2025 में नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल को विवि से फोन आया और बताया गया कि सत्र 2024-25 के 59 विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन लंबित है। साथ ही उसका पोर्टल भी बंद है। कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर मामले की जांच की, तब गबन का मामला सामने आया। नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल का कहना है कि नीरज ने 2016 में कुर्जी होली फैमिली हॉस्पिटल के नर्सिंग कॉलेज को ज्वाइन किया था। 2018 में इसकी सेवा की पुष्टि की गई। रजिस्ट्रेशन के समय 59 छात्रों से इसने अपने खाते में रजिस्ट्रेशन शुल्क ले लिया। नीरज पर कॉलेज की वेबसाइट से भी छेड़छाड़ करने का आरोप है। कुर्जी अस्पताल में वित्तीय लेनदेन की निगरानी के लिए अब सीसीटीवी के साथ-साथ रैंडम क्रॉस-चेकिंग की जा रही है।
आम जनता के लिए 'अमर उजाला' की सलाह: ठगी से कैसे बचें?
इन मामलों के खुलासे के बाद पटना के बड़े अस्पतालों में अब ऑडिट की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। लेकिन इससे अलग आमजन को भी खुद से निगरानी करनी होगी। इसके लिए सबसे पहले लोगों को डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता देनी होगी। आपसे जितना संभव हो, UPI, कार्ड या नेट बैंकिंग से भुगतान करें। इसका रिकॉर्ड बैंक के पास भी रहता है। अगर आपको रसीद मिलता है तो रसीद का अच्छी तरह से मिलान करें। यह जरुर देखें कि आपने जितना पैसा दिया है, रसीद पर उतनी ही राशि छपी है या नहीं। हाथ से लिखी रसीद की भी जांच करवाएं। बिल का भुगतान होने पर मोबाइल पर आने वाले एसएमएस की जांच जरुर करें। क्यों कि कई बड़े अस्पताल अब भुगतान होते ही मरीज के मोबाइल पर पुष्टिकरण मैसेज भेजते हैं। अगर मैसेज न आए, तो काउंटर से तुरंत पूछें। किसी भी तरह का संदेह होने पर हेल्पडेस्क की मदद लें, क्यों कि यदि काउंटर क्लर्क का व्यवहार संदिग्ध लगे, तो तुरंत अस्पताल के शिकायत केंद्र या वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करें।