Bihar Elections: महागठबंधन ने घोषणा पत्र को तेजस्वी-प्रण का नाम दिया। अब भाजपा ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि राजद जब भी प्रण लेता है, बिहार के लोगों को कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। लालू यादव भी सीएम बनने पर प्रण लिया था, लेकिन गाय का चारा ही खा गए।
महागठबंधन ने मंगलवार को घोषणा पत्र जारी किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार को नंबर वन राज्य बनाने का हमलोगों ने प्रण लिया है। महागठबंधन ने घोषणा पत्र को तेजस्वी प्रण पत्र नाम दिया है। अब भाजपा ने इसपर तंज कसा है। भाजपा नेता और विधान पार्षद प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने आज महागठबंधन के जारी घोषणा पत्र पर हमला करते हुए कहा कि ये लोग स्वर्ग में सीढ़ी लगाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ये जब भी प्रण लेते हैं तो बिहार के लोगों को कठिनाइयों से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को इनके प्रण से सावधान रहना होगा।
भाजपा नेता और विधान पार्षद प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने राष्ट्रीय जनता दल के शासनकाल की चर्चा करते हुए कहा कि जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने भी यह प्रण लिया था कि बिहार का नाजायज पैसा गाय के गोश्त के बराबर होगा और उसे ग्रहण नहीं करेंगे। उस युग का क्या परिणाम हुआ, यह आज सबके सामने है। लालू प्रसाद यादव गाय का चारा खाकर घर में बैठे हैं। उन्होंने जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी देने की महागठबंधन की घोषणा पर कहा कि कहीं उनसे भी ये लोग जमीन तो नहीं लिखवा लेंगे। ये वही लोग हैं जो अपने परिवार से बाहर नहीं सोचते हैं।
विधान पार्षद प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने हर घर में एक को सरकारी नौकरी देने के वादे पर तंज कसते हुए कहा कि क्या वे चारा घोटाला के पैसे से यह नौकरी देंगे? राजद के दौर में मेधा घोटाला करने वाले आज पढ़ाई और डिग्री की बात कर रहे हैं, यह हास्यास्पद है। राजद की सरकार में स्कूलों को ध्वस्त करने वाले आज शिक्षा और स्कूल की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनलोगों के प्रण-पत्र में बिहार की कोई ऐसी बात नहीं है जो शेष बची हो। इन लोगों ने सिर्फ स्वर्ग में सीढ़ी लगाने के काम को छोड़ दिया है। वरना ये बिहार के सभी कार्यों को करने का वादा करते । वैसे यह ख्वाब देख रहे हैं, क्योंकि बिहार की कोई बेटी और महिला उस दौर को बिहार में फिर नहीं लाना चाहती हैं। विधान पार्षद प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने कहा कि महागठबंधन को घोषणा पत्र में यह कहना चाहिए था कि सीएम हाउस से फिरौती की बात नहीं करेंगे, गुंडागर्दी की बात नहीं करेंगे। सरकार बनेगी तो अपराधियों को मंत्री नहीं बनाएंगे। लालू यादव पहली बार जब सीएम बने थे तब चार ऐसे लोगों को मंत्री बनाए थे जिन पर कई संगीन मामले दर्ज थे।