जल्द ही मंत्री लेसी सिंह को चुनौती देते दिख सकते हैं पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा।
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राजद को धमदाहा सीट पर मजबूती मिलेगी
सीमांचल में संतोष कुशवाहा को कोइरी समुदाय का एक बड़ा नेता माना जाता है। धमदाहा विधानसभा में मुस्लिम, यादव के साथ कोइरी समाज के मतदाताओं की संख्या भी अधिक है। राष्ट्रीय जनता दल ने संतोष कुशवाहा की नाराजगी को भरपूर भुनाया है। उन्हें पार्टी में शामिल करने से राजद को न सिर्फ धमदाहा सीट पर मजबूती मिलेगी, बल्कि यह निर्णय कुशवाहा वोट बैंक को अपने पाले में खींचने के लिए राजद की एक महत्वपूर्ण चाल भी है।
पीएम मोदी से मुलाकात करते पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा।
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इससे पहले भी बदल चुके हैं पाला
बता दें कि संतोष कुशवाहा का राजनीतिक जीवन कई बार पाला बदलने वाला रहा है। पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा ने पहली बार 2005 में पहली बार भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2010 में उन्होंने बायसी विधानसभा से भाजपा के टिकट पर फिर चुनाव लड़ा। इस बार जीत कर विधायक बने। 2013 भाजपा छोड़कर जदयू में शामिल हो गए। 2014 जदयू के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। 2019 जदयू के टिकट पर पुनः लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे लेकिन निर्दलीय पप्पू यादव उन्हें हरा दिया। अब आज विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने चार दिन बाद ही जदयू छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए।