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Bihar: 'भोजपुरी के शेक्सपियर' भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग तेज, अब इस फिल्म अभिनेता ने उठाई है आवाज

Sun, 27 Jul 2025 12:44 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar : 'भोजपुरी के शेक्सपियर' खे जाने वाले भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग अब फिर रफ़्गतार पकड़ ली है। यह मांग काफी पुरानी है। इसमें नई बात यह है कि इस बार यह भोजपुरी फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद ने उठाई है। 
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मनोज तिवारी और भिखारी ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोजपुरी के शेक्सपियर' कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर को 'भारत रत्न' देने की मांग एक बार फिर से उठने लगी है। यह मांग अब अभिनेता और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी की है। इससे पहले फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद रवि किशन सहित कई लोगों ने भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने के लिए केंद्र से लिखित अनुरोध किया है। हिंदी की सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भोजपुरी भाषा के समर्थकों ने पहले भी भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग की थी।

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मनोज तिवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखा था पत्र
इस संबंध में भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि महान भिखारी ठाकुर एक नाटककार, गीतकार, अभिनेता, लोक नर्तक, लोक गायक, लोक रंगमंच निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता थे। वह भारत के महानतम लोक कलाकारों में से एक थे। उन्होंने आगे कहा कि भिखारी ठाकुर अपने समय से बहुत आगे थे। उस समय उन्होंने अपना खुद का थिएटर ग्रुप बनाया। उन्होंने कई नाटक लिखे, जिनमें प्रतिष्ठित और दुनिया भर में लोकप्रिय प्रवासन-थीम वाला 'बिदेसिया' भी शामिल है। मनोज तिवारी ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर ठाकुर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (मरणोपरांत) देने की मांग की थी। 

जानिए रवि किशन ने क्या कहा 
इस संबंध में मनोज तिवारी ने कहा कि भिखारी ठाकुर के नाटक जैसे 'गंगा-स्नान', 'बिदेसिया', 'गबरघिचोर', 'बेटी-बेचवा', 'भाई-विरोध', 'पिया निसाइल' और 'नई-बहार' आज भी प्रासंगिक हैं और ये सभी समाज को एक संदेश देते हैं। भिखारी ठाकुर पुरातन सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ लड़ते हुए एक योद्धा का जीवन जिया। वहीं उत्तर प्रदेश से भाजपा सांसद रवि किशन ने भी बताया कि "मैं भी भिखारी ठाकुर के लिए भारत रत्न पुरस्कार की मांग करता रहा हूं... वह एक महान लोक कलाकार थे। उन्होंने भोजपुरी बोली में अपनी रचनाओं को इस तरह प्रस्तुत किया कि वह जनता को पसंद आई। उपनिवेशवाद के तहत सांस्कृतिक विघटन की पृष्ठभूमि में उन्होंने भोजपुरी कला परंपरा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया। वह इस पुरस्कार के हकदार हैं।"

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