बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी भक्त चरण दास (फाइल फोटो)
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बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी भक्त चरण दास बिहार के दौरे पर हैं। बीते 25 जनवरी को वो पटना पहुंचे। 25 और 26 को पटना में कांग्रेस नेताओं से फीडबैक लिया और फिर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा के साथ बिहार में कांग्रेस की जमीन नापने निकल पड़े। और इसी के साथ उनके सामने कांग्रेस की जमीनी स्थिति आ गई।
वैशाली, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी में तो प्रभारी की यात्रा में स्थानीय जिला इकाइयां 100-200 कार्यकर्ता भी नहीं जुटा पाईं। यही हाल बेतिया का भी रहा। वहां तो प्रदेश प्रभारी की मीटिंग में न लाइट का इंतजाम दिखा और ना ही कुर्सियों का।
कांग्रेस का बिहार प्रभारी बनने के बाद अपने पहले दौरे में ही भक्त चरण दास ये समझ गए थे कि बिहार कांग्रेस में अंतरकलह चरम पर है। पटना स्थित पार्टी मुख्यालय में उनके सामने कुर्सियां चलीं और हाथापाई हुई। इसके बाद जब वो दौरे पर निकले तो गोपलगंज में उनके सामने ही जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आपस में हाथापाई और धक्कामुक्की की।
इस दौरान प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ भी नारेबाजी हुई और कई तरह के आरोप लगे। वहीं, बक्सर में भी यही हुआ। बक्सर में दास के सामने स्थानीय कांग्रेस विधायक मुन्ना तिवारी को पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी झेलनी पड़ी। बात इतनी बढ़ी की आपसी धक्कामुक्की तक जा पहुंची। भोजपुर में तो कांग्रेस को फजीहत का सामना करना पड़ा। पार्टी की पूर्व एमएलसी डॉ. ज्योति ने प्रदेश प्रभारी के अभिनंदन समारोह में ही हंगामा शुरू कर दिया। ज्योति ने पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेताओं पर टिकट बेचने के आरोप तक लगाए।
भक्त चरण दास की बिहार यात्रा से कांग्रेस को कितना फायदा होगा इसका ठीक से अंदाजा कुछ दिनों बाद ही लग पाएगा। लेकिन इतना तय है कि लंबे अर्से बाद कांग्रेस में सैकड़ों लोगों के जुड़ने की खबर आई। पश्चिम चंपारण जिला मुख्यालय पहुंचे दास ने पूर्व सांसद पप्पू यादव की पार्टी को बड़ा झटका दे दिया।
यहां पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी की पूरी जिला इकाई ने अपने जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया। दास का बिहार दौरा अभी जारी है। कांग्रेस में जान फूंकने की उनकी कोशिश भी साफ दिख रही है, लेकिन मुश्किल ये है कि पार्टी के पास राज्य में न तो मजबूत संगठन है ना ही मजबूत ढांचा और ना ही कोई बड़ा चेहरा।