जदयू के नेता हर दूसरे दिन दावा कर रहे हैं कि राजद और कांग्रेस के कई विधायक उनके संपर्क में हैं और दल बदलने के लिए तैयार हैं। इस बीच चर्चा है कि कांग्रेस को अपने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी से ज्यादा खतरा है।
चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष रहते कांग्रेस ने बिहार में 27 सीटें जीती थीं। इस बार कांग्रेस के 19 विधायक हैं। तब जदयू, राजद और कांग्रेस ने मिलकर नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। चौधरी उस सरकार में मंत्री बने और तभी से वो नीतीश कुमार के होकर रह गए। बाद में जब नीतीश ने गठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ सरकार बनाई, तो अशोक चौधरी भी कांग्रेस छोड़ कर जदयू में शामिल हो गए।
चौधरी फिलहाल शिक्षामंत्री के साथ-साथ जदयू के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। सूत्रों का कहना है कि पुराने संबंधों के चलते कांग्रेस के कई लोग अब भी उनके संपर्क में हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले भी प्रदेश कांग्रेस टूट की कगार पर थी।
लालू की चाल से कांग्रेस विधायकों को डर है कि उछल-कूद करने से उनका दांव उल्टा पड़ सकता है। भाजपा और जदयू में अगर खटपट बढ़ी और राजद की कोशिशों को कामयाबी मिली तो पार्टी बदलने से नुकसान ही होगा। इसलिए व्याकुल विधायक मौके का इंतजार कर रहे हैं। वहीं पार्टी के नेतृत्व के अविश्वास से नये विधायक भी आहत हैं।
उनका कहना है कि जनता ने तो भरोसा जता दिया, लेकिन कांग्रेस परिवार के नए सदस्यों पर गार्जियन का अविश्वास करना ठीक नहीं। माना जा रहा है कि अशोक चौधरी एक बार फिर कांग्रेस तोड़ने के लिए सक्रिय हैं और इसीलिए मंत्रिमंडल का विस्तार रुका हुआ है। हालांकि विधानमंडल में कांग्रेस के मुख्य सचेतक राजेश कुमार ने ऐसी किसी भी आशंका को खारिज किया है।