मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम चंपारण और सारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। राहत शिविर का निरीक्षण कर उन्होंने सामुदायिक रसोई जारी रखने, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ तैनात रखने, तटबंधों की निगरानी और दशहरा से पहले परिवारों को 7,000 रुपये सहायता देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण जिले के बगहा, बैरिया प्रखंड के बथना, योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा तथा नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सारण जिले के मकेर प्रखंड अंतर्गत हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे तटबंध का भी हवाई सर्वेक्षण किया। पटना से पश्चिम चंपारण आने के दौरान उन्होंने नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति भी देखी।
हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड तथा महिलाओं और पुरुषों के लिए की गई आवासन व्यवस्था का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने सामुदायिक रसोई में स्वयं लोगों को भोजन परोसा।
उन्होंने शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। चिकित्सा शिविर में उपलब्ध दवाओं और उपचार की व्यवस्था का भी जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और जरूरतें जानीं तथा अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित लोग अपनी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों को दें, ताकि उन्हें तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर समीक्षा बैठक की। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने पश्चिम चंपारण जिले के मानचित्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, तटबंधों की स्थिति, राहत एवं चिकित्सा शिविरों तथा राहत-बचाव कार्यों की जानकारी दी। जिलाधिकारी ने जिले में बाढ़ की स्थिति, नदियों के जलस्तर, तटबंधों की स्थिति, प्रभावित आबादी, राहत सामग्री के वितरण, राहत एवं बचाव कार्यों तथा एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती के संबंध में जानकारी दी।
जल संसाधन विभाग के सचिव ने अवगत कराया
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है। कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा सके। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए हर स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है।
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित आबादी को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई का नियमित संचालन किया जाए। बाढ़ प्रभावित परिवारों को चिन्हित कर दशहरा से पहले 7,000 रुपये प्रति परिवार की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से कुछ दिन पहले भी बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7,000 रुपये की अनुग्रह सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है।
उन्होंने पानी की निकासी के लिए आवश्यकता के अनुसार स्लुइस गेट खोलने, नदियों के जलस्तर, तटबंधों और कटाव की लगातार निगरानी रखने तथा पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रभावित लोगों तक पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने के साथ पशुओं के लिए चारा और आश्रय की समुचित व्यवस्था करने को भी कहा।
सीएम ने क्या कहा?
इस दौरान उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सांसद संजय कुमार जायसवाल, सांसद सुनील कुमार, विधायक संजय कुमार पांडे, विधायक विनय बिहारी, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह, चंपारण प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक हरकिशोर राय, पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह, पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम सहित अन्य जनप्रतिनिधि, वरीय अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद थे।