भगवान बुद्ध की पावन धरती राजगीर में गुरुवार को इतिहास रचा गया। भूटान के प्रधानमंत्री लायोनचेन तैसो तेहरी टोब्गे ने यहां नव-निर्मित भूटान मॉनेस्ट्री का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेण रिजिजू और बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
कार्यक्रम में भूटान के मुख्य भिक्षु जे खेम्पो, भारत में भूटान के राजदूत सुधाकर दलेला समेत बड़ी संख्या में भूटानी और भारतीय बौद्ध धर्मावलंबी शामिल हुए। उद्घाटन के बाद घोषणा की गई कि मंदिर में अगले छह दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का संदेश
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का संदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वयं इस मंदिर का शिलान्यास किया था। निजी कारणों से उपस्थित न हो पाने के बावजूद उन्होंने शुभकामनाएं भेजी हैं। संदेश में कहा गया कि नालंदा की इस पावन धरती पर बना यह भव्य मंदिर भारत-भूटान मैत्री को और मजबूत करेगा।
केंद्रीय मंत्री का वक्तव्य
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस अवसर को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि राजगीर केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण बौद्ध केंद्र है। यह मॉनेस्ट्री भारत और भूटान के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश को याद दिलाया जब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि भारत ने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिया है। रिजिजू ने कहा कि राजगीर स्थित यह मॉनेस्ट्री दुनिया भर में शांति और सद्भाव का संदेश फैलाने का केंद्र बनेगी।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि नई भूटान मॉनेस्ट्री राजगीर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण साबित होगी। इससे स्थानीय होटल उद्योग, परिवहन सेवाओं और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।
द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय