बिहार में बेल्ट्रॉन के माध्यम से सरकारी विभागों में नियोजित कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर रविवार को पटना में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने रोड मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी लंबे समय से काम कर रहे बेल्ट्रॉन कर्मियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने, सेवा सुरक्षा और वेतनमान लागू करने की मांग कर रहे हैं। गांधी मैदान से इनकम टैक्स गोलंबर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जेपी गोलंबर पर रोक दिया। इससे नाराज कर्मचारियों ने हंगामा किया। बाद में वे डाकबंगला चौराहे पर पहुंचे और प्रदर्शन किया।
जेपी गोलंबर पर पुलिस ने रोका
प्रदर्शनकारियों ने दोपहर में गांधी मैदान के कारगिल चौक से इनकम टैक्स गोलंबर तक रोड मार्च शुरू किया था। हालांकि, गांधी मैदान से इनकम टैक्स की ओर जा रहे कर्मचारियों को पटना पुलिस की टीम ने जेपी गोलंबर पर रोक लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी नाराज हो गए और हंगामा करने लगे। कुछ देर बाद वे आगे बढ़े और डाकबंगला चौराहे पर पहुंचकर जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी भी शामिल रहीं। संयुक्त मोर्चा की ओर से बिहार के सभी 38 जिलों में भी रोड मार्च आयोजित किया गया।
20 हजार कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग
प्रदर्शन में सचिवालय और पटना के अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में बेल्ट्रॉन के माध्यम से नियोजित हजारों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इनमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, प्रोग्रामर, स्टेनोग्राफर और आईटी ब्वॉय-गर्ल शामिल थे। संयुक्त मोर्चा का दावा है कि करीब 20 हजार कर्मचारी पिछले 29 वर्षों से अधिक समय से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं।
कर्मचारियों ने मांग की कि उन्हें जल्द राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही सूचना प्रावैधिकी विभाग को नोडल विभाग घोषित करने और मांगों के संबंध में लिखित सरकारी आदेश जारी करने की भी अपील की।
'उम्र सीमा पार कर चुके कई कर्मचारी'
रोड मार्च को संबोधित करते हुए संयुक्त मोर्चा के संरक्षक चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि बेल्ट्रॉन कर्मियों ने अपने जीवन का बहुमूल्य समय राज्य सरकार को दिया है। लंबे समय तक सेवा देने के कारण कई कर्मचारियों की उम्र सरकारी नौकरी की निर्धारित सीमा से अधिक हो चुकी है। ऐसे में सरकार को उनकी सेवाएं नियमित कर राज्यकर्मी का दर्जा देना चाहिए।
1997 से काम, बिना सेवानिवृत्ति लाभ के रिटायर हुए कर्मचारी
संयुक्त मोर्चा के सदस्य अशोक कुमार यादव ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 1997 से इन कर्मचारियों की सेवाएं ले रही है। उनके अनुसार, 29 वर्षों के दौरान सैकड़ों कर्मचारी बिना किसी सेवानिवृत्ति लाभ के ही रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में टाइपिंग से लेकर ऑनलाइन कार्यों तक की जिम्मेदारी निभाते हैं। काम स्थायी प्रकृति का होने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अशोक कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में जल्द नीतिगत निर्णय लेने और कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग की।
पद सृजन और वेतनमान लागू करने की मांग
संयुक्त मोर्चा के सदस्य विशाल कुमार ने कहा कि पिछले 29 वर्षों से बेल्ट्रॉन कर्मियों से ठेका मजदूर के रूप में काम लिया जा रहा है। सरकार ने अब तक उनकी सेवा शर्तों और नियमावली का निर्धारण नहीं किया है और न ही सेवा सुरक्षा दी है। उन्होंने मांग की कि कर्मचारियों के लिए पद सृजित कर उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा और निर्धारित वेतनमान दिया जाए। विशाल कुमार ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर संयुक्त मोर्चा प्रदेश स्तर पर हड़ताल और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।
नियुक्ति प्रक्रिया और रोस्टर पालन का भी दिया हवाला
संयुक्त मोर्चा के सदस्य रघुनन्दन कुमार ने कहा कि सरकारी विभागों में बेल्ट्रॉन कर्मियों की भूमिका और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। वे करीब तीन दशकों से नियमित रूप से अपने निर्धारित कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन सेवा सुविधाओं के अभाव में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने दावा किया कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति राज्य सरकार के निगम के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थी और इसमें रोस्टर बिंदुओं का भी पालन किया गया था। इसके बावजूद उन्हें स्थायी सेवा सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। संयुक्त मोर्चा ने सरकार से कर्मचारियों की मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की है।