प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गयाजी में हुई जनसभा को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद की इधर जुबान फिसली और उधर उन्हें झटका लग गया। तेजस्वी यादव की कमान में चल रहे राजद के दो विधायक पीएम मोदी के मंच पर नजर आए। राजद की नवादा विधायक विभा देवी और रजौली विधायक प्रकाश वीर ने पहले भी तेजस्वी यादव को लेकर अपना दर्द जाहिर किया था। अब भाजपा के मंच पर नजर आकर अंतिम संदेश दे दिया। बिहार चुनाव सामने है, ऐसे में यह इस्तीफा देंगे या इनकी सदस्यता जाएगी- आसार कम हैं। लेकिन, राजद को यह झटका तो लग गया।
अब, इस झटके के साथ बिहार चुनाव 2020 में 75 सीटें जीतने वाली लालू प्रसाद की पार्टी के पास 69 विधायकों की ताकत शेष रह गई है। महागठबंधन के दूसरे बड़े दल कांग्रेस की भी ताकत जीते विधायकों से कम है। वामदल भी एक नुकसान में पहले से है। वीआईपी का तो सूपड़ा ही साफ है। आइए, जानते हैं कि बिहार चुनाव 2020 से लेकर 22 अगस्त 2025 तक किन परिस्थितियों में बिहार विधानसभा का गणित कब-कैसे-क्यों बदला?
भाजपा: 74 सीटें जीतकर आई, अभी 80 पर है
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा को 74 सीटें हासिल हुई थी। फिर उप चुनाव में भाजपा ने राजद की कुढ़नी विधानसभा सीट छीन ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के तब साथ रहे मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के तीनों विधायकों को भाजपा ने अपनी पार्टी में मिला लिया। तीन ही विधायक थे, इसलिए दल-बदल कानून लागू नहीं हुआ। इस तरह भाजपा के विधायकों की संख्या 78 हो गई थी। लोकसभा चुनाव में राजद के रामगढ़ विधायक और भाकपा-माले के तरारी विधायक सांसद बने तो बिहार विधानसभा की इन दो खाली सीटों के लिए उप चुनाव 2024 हुआ। इसमें दोनों सीटें भाजपा ने अपने खाते में कर अपनी संख्या 80 कर ली। उसकी संख्या 79 हो जाती, लेकिन दरभंगा के अलीनगर से भाजपा विधायक मिश्री लाल यादव की सदस्यता पहले छीनी गई और फिर हाईकोर्ट से राहत के बाद बहाल हो गई।
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जदयू: 43 सीटें जीतकर आया, अभी 45 विधायक
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड ने तीसरे नंबर पर उतर गई थी और उसे महज 43 सीटें मिली थीं। चुनाव बाद की परिस्थितियों में जदयू ने बहुजन समाज पार्टी के अकेले और लोक जनशक्ति पार्टी के इकलौते विधायक को शामिल करा लिया। उसके पास 45 विधायक हो गए थे। लेकिन, नवंबर 2020 में जनादेश से बनी राजग सरकार के बाद बीच में आई महागठबंधन सरकार फरवरी 2024 में गई तो जदयू को नुकसान करती भी गई। मुख्यमंत्री राजग में वापस आए तो फ्लोर टेस्ट हुआ। इसमें हेरफेर का केस अभी चर्चा में है। वजह तत्कालीन जदयू विधायक बीमा भारती हैं। पूर्णिया के रूपौली की तत्कालीन जदयू विधायक बीमा भारती ने राजद का दामन थाम लिया। उन्होंने यह औपचारिकता लोकसभा चुनाव के पहले की। उससे जदयू के विधायकों की संख्या 44 रह गई। बीमा भारती की छोड़ी रूपौली सीट भी जदयू के पास नहीं रही। वहां से निर्दलीय शंकर सिंह जीते। वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आस्था रखते हैं, लेकिन जदयू में नहीं हैं। उप चुनाव 2024 में बेलागंज सीट राजद से छीनकर जदयू ने अपनी संख्या वापस 45 कर ली थी। अभी यही स्थिति है।
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राजद : 75 सीटें जीतकर आया, पार्टी में अब 69 शेष
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में राजद ने 75 सीटें जीती थीं। उप चुनाव में वह अपनी कुढ़नी सीट हार गई। एक संख्या घटी, लेकिन फिर मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी के बोचहां विधायक के निधन से खाली हुई सीट उप चुनाव में उसने जीत हासिल कर अपने विधायकों की संख्या वापस 75 कर ली। फिर, तेजस्वी यादव ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच में से चार विधायकों को राजद में मिला लिया। इस तरह राजद की संख्या 79 थी। बेलागंज और रामगढ़ विधायकों के लोकसभा चुनाव में सांसद बनने के बाद इन दोनों सीटों पर उप चुनाव 2024 हुआ तो राजद यह सीटें बचा नहीं सका। इसके बाद राजद विधायकों की संख्या 77 रह गई। लेकिन, यह आंकड़ा कागज पर ही है।
वास्तविकता में बिहार की मौजूदा सरकार के फ्लोर टेस्ट के समय राजद के चार विधायक चेतन आनंद, प्रह्लाद यादव और नीलम देवी ने जदयू और संगीता कुमार ने भाजपा का दामन थाम लिया था। फिर कुछ समय बाद बजट सत्र 2024-25 के आखिरी दिन भभुआ के राजद विधायक भरत बिंद सम्राट चौधरी के साथ विधानसभा पहुंचे और भाजपा में औपचारिक तौर पर आ भी गए। इस तरह 5 का नुकसान तो इसे पहले से था। इनकी मान्यता रद्द नहीं हुई है, लेकिन यह राजद के साथ नहीं हैं। इसके अलावा, लालू प्रसाद यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को परिवार के साथ पार्टी से भी निष्कासित कर दिया है। उनकी मान्यता रद्द करने के लिए राजद ने आवेदन नहीं दिया है। तेज प्रताप कभी राजद के सुर में बोलते हैं तो कभी तेजस्वी यादव को सीख देते हैं, इसलिए उनके रुख का पता सिर्फ फ्लोर टेस्ट जैसी स्थिति में ही चलेगा।
वैसे, तेज प्रताप को चूंकि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पार्टी से निष्कासित किया है और बाकी पहले के पांच की विधायकी छीनने के लिए राजद ने विधानसभा में आवेदन दे रखा है तो लालू की पार्टी के कुल विधायकों की संख्या 77-6=71 तो वैसे ही है। अब दो विधायक विभा देवी और प्रकाश वीर ने पीएम मोदी के मंच पर हाजिरी लगाकर राजद की ताकत 71-2=69 कर दी है। मतलब, कागज पर 77 और चुनाव के समय वास्तव में साथ महज 69 ही। वैसे, चुनाव में अभी वक्त है और खेला अभी कुछ और भी बाकी है।