प्रशांत किशोर को लेकर इन दिनों तीन तरह की बातें फिज़ा में हैं। कुछ जमीन पर भी दिख रहा।
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बिहटा में आश्रम, बांकीपुर में चुनावी चर्चा, उधर टीम बिखरी
प्रशांत किशोर इन दिनों पटना पर फोकस कर रहे हैं। राजनीतिक बयानबाजी कम कर रहे, लेकिन माहौल पूरा बना रहे हैं। पिछले हफ्ते वह पटना के बिहटा में भूमि पूजन के लिए गए थे। जैसे उन्होंने गांधीजी के चंपारण की धरती को चुना था, इस बार किसानों के लिए बिगुल फूंकने वाले स्वामी सहजानंद के नाम पर आगे बढ़ रहे हैं। जन सुराज का केन्द्र बिहटा के अमहरा गांव में बनने जा रहा है। आश्रम का नाम कहा जा रहा है। घोषित नहीं है, लेकिन करीब 16 बीघे में जनसुराज का केंद्र बन रहा है। कई करोड़ में यहां स्ट्रक्चर तैयार करने का काम अब युद्ध स्तर पर चल रहा है। जन सुराज के कर्ता-धर्ता प्रशांत किशोर पिछले दिनों इस गांव में पहुंचे और राघवपुर में जनप्रतिनिधियों-किसानों से बात भी की। मतलब, पटना के बिहटा में एक तरह से जन सुराज ने अपना बड़ा केंद्र तैयार करना शुरू कर दिया है।
इस बीच एक चर्चा प्रशांत किशोर के बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ने की भी खूब चल रही है। भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई यह सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट है, इसलिए प्रशांत किशोर यहां उतरेंगे ही- पक्का कहना लगभग असंभव है। हां, चर्चा खूब है। गरमी के इस मौसम से भी गरम। मीडिया के जरिए आम आदमी तक। लेकिन, संकट एक यह साफ दिख रहा है कि प्रशांत किशोर के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के पहले काम कर रही प्रचार टीम बिखर चुकी है। चुनाव के तत्काल बाद एक तरह से ऊपरी हिस्से का विघटन ही हो चुका है। ज्यादातर सीनियर लोग या तो उनका साथ छोड़ गए या मुक्त कर दिए गए। ऐसे में बांकीपुर से चुनाव लड़ना राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगाने जैसा होगा, लेकिन इसके बावजूद चर्चा जबरदस्त है। शायद यही कारण है कि जन सुराज को सामने आकर कहना पड़ा कि यह अफवाह है।