आगामी विधानसभा चुनाव 2025 को स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए रोहतास जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने आदेश जारी कर जिले के सभी लाइसेंसधारियों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन दिनों के भीतर अपने-अपने हथियार संबंधित थाने में जमा करें। इस आदेश के बाद जिले भर में लाइसेंसधारियों में हड़कंप मच गया है और बड़ी संख्या में लोग अपने शस्त्र थानों में जमा कराने पहुंचने लगे हैं।
जिला प्रशासन ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि यदि कोई लाइसेंसधारी इस निर्देश की अवहेलना करता है या लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ऐसे व्यक्तियों का शस्त्र लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। प्रशासन का कहना है कि चुनाव अवधि में हथियारों के अवैध उपयोग या खुले प्रदर्शन से मतदान वातावरण प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए यह कदम जनहित में उठाया गया है ताकि जिले में शांति, सद्भावना और सुरक्षा का माहौल बना रहे।
सुरक्षा कारणों से कुछ शस्त्रधारियों को छूट
जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल वही शस्त्रधारी इस आदेश से छूट पाएंगे, जिन्हें सुरक्षा कारणों से विशेष अनुमति दी गई हो। यह अनुमति केवल सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश से ही दी जाएगी।
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कानूनविदों की राय
इस आदेश पर सासाराम के वरिष्ठ अधिवक्ता नागेंद्र पांडे ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिला प्रशासन का यह निर्णय पूरी तरह से उचित नहीं है। उनके अनुसार, प्रशासन को केवल उन्हीं व्यक्तियों से हथियार जमा कराना चाहिए जिनके खिलाफ आपराधिक सूचना, सरकारी रिपोर्ट या चुनाव में गड़बड़ी फैलाने की आशंका हो। उन्होंने कहा कि सभी लोगों से शस्त्र जमा कराने से कई व्यक्तियों के बीच असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो सकती है।
लाइसेंस रद्द करने के सवाल पर अधिवक्ता ने बताया कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है, और किसी व्यक्ति का लाइसेंस तभी रद्द किया जा सकता है जब उसके द्वारा शस्त्र का गलत उपयोग किया गया हो या कोई विशेष परिस्थिति उत्पन्न हुई हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
इस बीच, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पिछले वर्ष एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया था। अदालत ने कहा था कि चुनाव के समय किसी शस्त्रधारी को बिना कारण बताए सामान्य आदेश द्वारा शस्त्र जमा कराने का निर्देश कानूनन गलत है। कोर्ट के अनुसार, केवल उसी व्यक्ति को शस्त्र जमा कराने का आदेश दिया जा सकता है, जिसके खिलाफ सक्षम अधिकारी द्वारा लिखित और कारणयुक्त आदेश पारित किया गया हो।
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि चुनाव अवधि के दौरान हथियार जमा करने का आदेश विधि-व्यवस्था के हित में उचित है, लेकिन इसे सभी लाइसेंसधारकों पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।