बिहार विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने सदन को संबोधित करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादा और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन की कार्यवाही में सक्रिय, तथ्यपूर्ण और रचनात्मक भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।
अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार विधानसभा भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां जनता की अपेक्षाओं, आकांक्षाओं और समस्याओं का संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप समाधान खोजा जाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि जनभावनाओं, लोककल्याण और संविधान की आत्मा का सजीव प्रतीक है। सदन में होने वाला प्रत्येक विचार-विमर्श करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है, इसलिए संवाद, शालीनता, मर्यादा और उत्तरदायित्व बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।
बिपार्ड प्रशिक्षण के बारे में क्या कहा?
प्रेम कुमार ने हाल ही में गया स्थित बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम में भाग लेने वाले विधायकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रिया, विधायी एवं बजटीय कार्य, समिति प्रणाली, सदस्यों के विशेषाधिकार, संसदीय आचरण और जनप्रतिनिधियों की भूमिका जैसे विषयों पर प्राप्त प्रशिक्षण से सदन की कार्यवाही और अधिक प्रभावी, अनुशासित तथा जनोन्मुख बनेगी।
जनसेवा को बताया सर्वोच्च धर्म
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सबसे बड़ा दायित्व निष्ठापूर्वक अपने कर्तव्यों का पालन करना और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। उन्होंने सभी सदस्यों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बिहार और देश के व्यापक हित में कार्य करने का आह्वान किया।
प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार ज्ञान, तप, त्याग और लोकतांत्रिक परंपराओं की भूमि रही है। भगवान बुद्ध ने यहीं करुणा का संदेश दिया, भगवान महावीर ने अहिंसा का मार्ग दिखाया, चाणक्य ने सुशासन की अवधारणा विकसित की और नालंदा तथा विक्रमशिला ने पूरी दुनिया को ज्ञान का प्रकाश दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विधायक अपने दायित्वों का निर्वहन और अधिक दक्षता एवं प्रभावशीलता के साथ कर सकेंगे।
'लोकतंत्र की शक्ति स्वस्थ बहस में'
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मानसून सत्र राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान अनेक विधायी, वित्तीय और जनहित से जुड़े विषय सदन के समक्ष आएंगे। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस, सार्थक विमर्श और रचनात्मक सहयोग ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति हैं और इन्हीं के माध्यम से सदन नई कार्य-संस्कृति स्थापित कर सकता है।
'सदन बहस का मंच है, टकराव का नहीं'
अपने संबोधन में प्रेम कुमार ने कहा, "यह सदन बहस का मंच है, संघर्ष का नहीं; तर्क का मंच है, कटुता का नहीं; समाधान का मंच है, टकराव का नहीं।" उन्होंने कहा कि जनता ने सभी सदस्यों को अपने विश्वास का प्रतिनिधि बनाकर सदन में भेजा है, इसलिए प्रत्येक शब्द, निर्णय और आचरण लोकतंत्र की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी सदस्यों से प्रश्नकाल, शून्यकाल, विधायी कार्य और विभिन्न चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह करते हुए कहा कि बिहार के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के भविष्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन जैसे विषयों पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। अंत में उन्होंने सभी सदस्यों से लोकतांत्रिक गरिमा, संसदीय परंपराओं, अनुशासन, संवैधानिक मूल्यों और जनहितकारी निर्णयों के प्रति सामूहिक संकल्प लेने की अपील की।