पटना उच्च न्यायालय ने आज एक बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से आजीवन आवास सुविधा को वापस ले लिया है। इसका मतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब सरकारी आवास खाली करने होंगे। अदालत ने यह आदेश मुख्यमंत्रियों के आजीवन सरकारी बंगले की सुविधा को खत्म करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
इससे पहले की सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की खंडपीठ ने यह फैसला दिया है। राज्य सरकार की तरफ से सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास की सुविधा दी गई है।
अदालत ने सरकारी बंगले पर असीमित खर्च किए जाने की छूट को असंवैधानिक घोषित किया है और कहा है कि जनता के पैसों पर फिजूलखर्ची नहीं चलेगी। अदालत का कहना है कि विधायक और विधान परिषद् के सदस्य फ्लैट रख सकते हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों की हैसियत से जिन्हें बंगले मिले हैं उन्हें उसे अब छोड़ देना चाहिए।
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिन मुख्यमंत्रियों के आवास छिन जाएंगे उनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, सतीश प्रसाद सिंह, डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा और जीतन राम मांझी भी शामिल है। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास, गाड़ी और कर्मचारियों की सुविधा को छीन लिया था।
पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह को तुरंत अपने सरकारी बंगलों को खाली करना होगा। वहीं जीतन राम मांझी और राबड़ी देवी विधायक होने के नाते बंगले में रह सकते हैं लेकिन सरकारी गाड़ी और कर्मचारियों की सुविधा से उन्हें वंचित होना पड़ेगा। अब उन्हें निजी गाड़ियों से चलना होगा। इसके अलावा उन्हें कर्मचारियों का खर्च भी खुद ही उठाना पड़ेगा।