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Patna High Court : जातीय जन-गणना के खिलाफ PIL पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई, कोर्ट कल सुनाएगी फैसला

Wed, 03 May 2023 01:16 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar : जाति आधारित जन-गणना को लेकर पटना हाईकोर्ट में लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट अब गुरुवार को फैसला सुनाएगी।
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पटना हाईकोर्ट की जजों पर कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बिहार में जाति आधारित जन-गणना को लेकर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो हुई। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव और दीनू कुमार और बिहार सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने अपना-अपना पक्ष रहा। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनी। इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अब कोर्ट गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाएगी। 

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मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता से पूछा था कि सरकार को यह कराना था तो इसके लिए कोई कानून क्यों नहीं पास किया? इसपर महाधिवक्ता शाही ने जवाब दिया था कि राज्यपाल के अभिभाषण में सारी बातें स्पष्ट की गईं कि इसे किस आधार पर कराया जा रहा है और इसका लक्ष्य अंतिम तौर पर राज्य की जनता के लिए योजनाओं को बनाने और क्रियान्वित करने का है। 

एक और दो अप्रैल को भी हुई थी सुनवाई
बता दें कि जाति आधारित जन-गणना पर सोमवार को सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन जनहित याचिका पर सरकार की ओर से दिया गया बिंदुवार जवाब रिकॉर्ड पर नहीं होने के कारण मंगलवार की तारीख मिली थी। मंगलवार को पूरे दिन कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनी। जनहित याचिका दायर करने वाले लोग इस बात से उत्साहित दिखे कि कोर्ट ने सरकार से जातिगत गणना के लिए कानून नहीं बनाए जाने पर सवाल पूछा। 
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जानिए, क्या दलीलें है याचिकाकर्ताओं की

  • "बिहार सरकार जातीय गणना के नाम पर एक-एक जन की गणना कर रही है, इसलिए यह जनगणना है। जनगणना का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है। यह राज्य सूची या संवर्ती सूची में नहीं है। सर्वे बताकर हर आदमी को गिनना जनगणना है और यह राज्य सरकार की ओर से कराना असंवैधानिक है।”
  • “राज्य सरकार एक-एक आदमी को गिनवा रही है और इसमें कई जातियों का नाम गायब है, जबकि कई जातियों का नाम बदल दिया गया है। ऐसे में जिस आदमी की गणना नहीं होगी, उसका मौलिक अधिकार छिन सकता है। आधार समेत सारे दस्तावेज रहने पर भी किसी का मौलिक अधिकार छीनने का हक राज्य सरकार को नहीं है।
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