पटना जिला उपभोक्ता आयोग ने सैनिटरी पैड निर्माण मशीनों की पूरी आपूर्ति नहीं होने पर विक्रेता को ब्याज के साथ राशि लौटाने का आदेश दिया है। बिहार उद्यमी योजना की लाभार्थी को मानसिक पीड़ा और आजीविका के नुकसान के लिए मुआवजा भी मिलेगा। आयोग ने आदेश के पालन के लिए 60 दिन की समयसीमा तय की है। आइये जानते हैं जानते हैं पूरा मामला...
सैनिटरी पैड निर्माण मशीनों की पूरी आपूर्ति नहीं करना विक्रेता को भारी पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने मामले में विक्रेता को शिकायतकर्ता के 1.30 लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और आजीविका के अवसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए 75 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमा खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने होंगे। इस तरह ब्याज से पहले कुल देय राशि 2.15 लाख रुपये है।
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उद्यमी योजना की लाभार्थी ने खरीदी थीं मशीनें
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अनुसार, शिकायतकर्ता बिहार उद्यमी योजना की लाभार्थी थीं। उन्होंने इंडिया मार्ट के माध्यम से सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीनें खरीदने के लिए विक्रेता को तीन लाख रुपये अग्रिम दिए थे। हालांकि, विक्रेता ने कुछ मशीनों की ही आपूर्ति की और बाकी जरूरी मशीनें उपलब्ध नहीं कराईं।
शिकायतकर्ता ने शेष मशीनों की आपूर्ति के लिए कई बार विक्रेता से संपर्क किया। आरोप है कि आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद कानूनी नोटिस भी भेजा गया, लेकिन मशीनों की पूरी आपूर्ति नहीं की गई। आखिरकार शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने सुनाया फैसला
मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आयोग ने विक्रेता की सेवा में कमी को स्वीकार किया। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से एकपक्षीय मंजूरी देते हुए 1.30 लाख रुपये 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया। इसके साथ ही 75 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने को कहा।
60 दिनों के भीतर करना होगा आदेश का पालन
आयोग ने आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने पारित किया।