फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तो इसलिए खास होगी नीतीश की ताजपोशी

विज्ञापन
विज्ञापन
नीतीश कुमार जब पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे, तो उसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर भी होगी। शपथ ग्रहण समारोह को राष्ट्रीय स्वरूप देने की पूरी तैयारी की जा चुकी है। कहा जा रहा है कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह को एशिया के स्तर पर आयोजित किया था, उसी प्रकार नीतीश ने भी अपने शपथ ग्रहण को राष्ट्रीय स्वरूप देने का प्रयास किया है।
विज्ञापन


समारोह में कश्मीर से कन्याकुमारी, तो गुजरात से असम तक के नेता शामिल हो रहे हैं। यह समारोह एक और मामले में खास होगा। पिछले दो दशकों से राजनीति में धुर विरोधी रहे कई नेता इस समारोह में शामिल होंगे। देश के कई ऐसे चेहरे एक साथ दिखेंगे, जो राजनीतिक रूप से आज एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समारोह में शामिल हो रही हैं, तो उनके धुर-विरोधी माकपा महासचिव सीताराम येचुरी भी इसमें शिरकत करेंगे। इसी प्रकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी समारोह में नजर आएंगे। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस धुर विरोधी माने जाते हैं, लेकिन नीतीश के शपथ ग्रहण समारोह में एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार आ रहे हैं, जबकि शिवसेना ने अपने दो प्रतिनिधि यहां भेजे हैं।
विज्ञापन


इसी प्रकार झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आ रहे हैं तो झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी समारोह में दिखेंगे। इन दोनों का राज्य में अब तक गठबंधन नहीं हो पाया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की उपस्थिति होना संभावी है। मेहमानों की लंबी सूची है।
विज्ञापन

एक ही मंच पर नजर आएंगे धुर-विरोधी नेता

नीतीश का आमंत्रण प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया है, लेकिन पहले से निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण उन्होंने समारोह में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त की और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू और कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राजीव प्रताप रुडी को अपने प्रतिनिधि के तौर पर कार्यक्रम में भेजा है।

इस समारोह में वैसे भाजपा विरोधी दल ज्यादा नजर आएंगे। राजनीतिक गलियारे में इस समारोह में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के नेताओं के शामिल होने को नए राजनीतिक गठजोड़ के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसी संभावना है कि इस गठजोड़ का असर संसद में और संसद के बाहर भी देखा जाएगा।

गौरतलब है कि लालू प्रसाद ने कहा था कि इसका राष्ट्रीय राजनीति पर असर होगा और इसके दूरगामी परिणाम होंगे। वैसे जानकारों का मानना है कि कार्यक्रम में जिस प्रकार से राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिज्ञों का जमावड़ा हो रहा है, उससे भाजपा विरोधियों में नीतीश अपनी एक जगह तो कायम कर ही लेंगे। आनेवाले समय में ज्योति बसु की तरह नीतीश प्रधानमंत्री हों ना हों, लेकिन सर्वप्रिय तो वह हो ही चुके हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें